संगीत की दिव्य उत्पत्ति

भारतीय संस्कृति में संगीत को केवल मनोरंजन का साधन नहीं, बल्कि एक आध्यात्मिक कला माना गया है। पौराणिक मान्यताओं के अनुसार, संगीत की उत्पत्ति की जड़े ब्रह्मांड के रचयिता भगवान ब्रह्मा से जुड़ी हुई हैं। माना जाता है कि ब्रह्मा जी ने अपनी आध्यात्मिक शक्ति और ज्ञान से संगीत रूपी इस अलौकिक कला का सृजन किया।

सृष्टि के निर्माण के बाद ब्रह्मा जी ने यह अमूल्य कला ज्ञान एवं विद्या की देवी मां सरस्वती को सौंप दी। देवी सरस्वती को 'वीणा पुस्तक धारिणी' कहा जाता है, जो संगीत और साहित्य दोनों की अधिष्ठात्री देवी हैं। उनके हाथों में सुशोभित वीणा इस बात का प्रतीक है कि संगीत मन और आत्मा को ईश्वर से जोड़ने का एक पवित्र माध्यम है।

आगे चलकर देवी सरस्वती ने अपने इस आध्यात्मिक ज्ञान और संगीत विद्या की शिक्षा देवर्षि नारद को दी। नारद मुनि ने तीनों लोकों में भ्रमण करते हुए संगीत के इस पावन ज्ञान का व्यापक प्रचार-प्रसार किया। इस प्रकार, संगीत की यह अविरल धारा देवलोक से होकर जन-जन तक पहुँची और आज भी हमारे जीवन को शांति और भक्ति रस से सराबोर करती है।

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