संगीत की देवी: माँ सरस्वती

भारतीय संस्कृति और परंपरा में माँ सरस्वती को ज्ञान, कला, साहित्य और संगीत की अधिष्ठात्री देवी माना गया है। प्राचीन काल से ही संगीतकारों, गायकों और साधकों के लिए माँ सरस्वती की आराधना सर्वोपरि रही है। माना जाता है कि उनके हाथों में विराजमान वीणा संपूर्ण ब्रह्मांड में मधुर ध्वनि और चेतना का संचार करती है।

संगीत केवल मनोरंजन का साधन नहीं, बल्कि आत्मा को परमात्मा से जोड़ने वाली एक पावन साधना है। जब कोई कलाकार अपने सुर पिरोता है, तो वह माँ सरस्वती के आशीर्वाद की ही प्रार्थना करता है। बिना ज्ञान और एकाग्रता के संगीत अधूरा है, और यह एकाग्रता देवी सरस्वती की कृपा से ही संभव होती है।

बसंत पंचमी के पावन अवसर पर विशेष रूप से माँ सरस्वती की पूजा-अर्चना की जाती है। विद्यालय हों या संगीत घराने, हर जगह छात्र और कलाकार अपनी कला को निखारने के लिए उनसे सद्बुद्धि और सुरीले कण्ठ का वरदान माँगते हैं। माँ सरस्वती का पावन रूप हमें जीवन में अज्ञानता का अंधेरा मिटाकर ज्ञान और कला का प्रकाश फैलाने की प्रेरणा देता है।

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