संगीत के प्रमुख अंग और उनका मेल
भारतीय कला और संस्कृति में संगीत का स्थान अत्यंत उच्च माना गया है। आम तौर पर लोग केवल गाने को ही संगीत समझ लेते हैं, लेकिन वास्तव में इसका दायरा इससे कहीं अधिक व्यापक है। शास्त्रीय दृष्टिकोण से गायन, वादन और नृत्य के त्रिवेणी संगम को ही संगीत कहा जाता है।
ये तीनों कलाएं एक-दूसरे से गहराई से जुड़ी हुई हैं। गायन में स्वरों और शब्दों के जरिए भावनाओं को व्यक्त किया जाता है। वादन विभिन्न वाद्यों की ध्वनियों से उन स्वरों को गहराई और लयबद्धता प्रदान करता है। वहीं नृत्य उसी ताल और भाव को शारीरिक मुद्राओं के माध्यम से जीवंत रूप देता है।
जब ये तीनों विधाएं एक साथ मिलकर प्रयुक्त होती हैं, तभी 'संगीत' शब्द की सार्थकता सिद्ध होती है। इनमें से किसी एक के बिना संगीत का अनुभव अधूरा रहता है। यही कारण है कि इन तीनों के समावेश को संगीत का मूल आधार माना गया है।
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