संगीत की उत्पत्ति और इसके मूल स्रोत

संगीत इंसानी सभ्यता का एक बेहद खूबसूरत और प्राचीन हिस्सा है। लेकिन क्या आपने कभी सोचा है कि संगीत की शुरुआत आखिर कहाँ से हुई? संगीत के मूल स्रोत हमारी रोज़मर्रा की जिंदगी, इंसानी आवाज़ और कुदरत की ध्वनियों में गहराई से जुड़े हुए हैं।

संगीत की जड़ें सबसे पहले मानव संचार और बोलचाल की भाषा में देखने को मिलती हैं। जब इंसान ने अपनी भावनाओं को व्यक्त करने के लिए आवाज़ के उतार-चढ़ाव का इस्तेमाल किया, तो वहीं से सुरों की नींव पड़ी। इसके अलावा, काम करने या खेलने के दौरान बनने वाली लय, तालियाँ बजाना और गुनगुनाना इंसानी शरीर के प्राकृतिक संगीत को दर्शाता है।

प्रकृति भी संगीत की सबसे बड़ी प्रेरणा रही है। समुद्र की लहरों की गर्जना, हवा की सरसराहट और जानवरों की आवाज़ों की नकल (मिमिक्री) ने शुरुआती इंसानों को ध्वनियों को समझना सिखाया। यहाँ तक कि लोहार के हथौड़े और निहाई की ठक-ठक जैसी पर्यावरणीय ध्वनियों ने भी ताल और लय को गढ़ने में मदद की। इस तरह, इंसान और प्रकृति की लयों के मिलन से ही संगीत का जन्म हुआ।

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