संगीत और उसके थाटों का सुंदर संसार

भारतीय शास्त्रीय संगीत एक बहुत ही गहरा और समृद्ध विषय है। अक्सर लोग संगीत के मूलभूत ढाँचे को लेकर भ्रमित हो जाते हैं और 'थाट' को 'तार' (strings) समझ बैठते हैं। संगीत में 'तार' वाद्य यंत्रों (जैसे सितार या गिटार) में होते हैं, लेकिन जब शास्त्रीय संगीत के नियमों की बात आती है, तो मुख्य आधार थाट होते हैं।

उत्तर भारतीय यानी हिंदुस्तानी शास्त्रीय संगीत में कुल 10 थाट माने गए हैं। पंडित भातखंडे जी ने रागों को समझने और वर्गीकृत करने के लिए इन 10 थाटों की रचना की थी। ये 10 थाट हैं: बिलावल, कल्याण, खमाज, काफी, असावरी, भैरव, भैरवी, मारवा, पूर्वी, और तोड़ी

हर थाट सात स्वरों (सा, रे, ग, म, प, ध, नि) का एक ऐसा समूह होता है, जिससे अलग-अलग राग पैदा होते हैं। आसान शब्दों में कहें तो थाट संगीत का वह जनक या पिता है, जिससे नए-नए और मधुर राग जन्म लेते हैं। जब आप इन 10 थाटों के नियमों और स्वरों को समझ लेते हैं, तो शास्त्रीय संगीत की कला को समझना बहुत आसान हो जाता है। यही 10 थाट हमारे संगीत की विविधता और सुंदरता की असली पहचान हैं।

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