संगीत में तीव्र स्वर की पहचान

भारतीय शास्त्रीय संगीत में स्वरों का बहुत ही सुंदर और वैज्ञानिक विभाजन किया गया है। जब हम संगीत के मूल आधार को समझते हैं, तो सबसे पहले स्वरों के ज्ञान की आवश्यकता होती है। संगीत में कुल मिलाकर 12 स्वर होते हैं, जिन्हें शुद्ध, कोमल और तीव्र वर्गों में बाँटा गया है।

इन 12 स्वरों में से 7 स्वर मुख्य या शुद्ध स्वर माने जाते हैं, जो हैं—सा, रे, ग, म, प, ध, और नि। लेकिन क्या आप जानते हैं कि इनमें से तीव्र स्वर कितने होते हैं? भारतीय संगीत पद्धति में तीव्र स्वर केवल एक ही होता है, और वह है 'म॑' (तीव्र मध्यम)

जब 'म' स्वर अपने मूल स्थान या शुद्ध रूप से थोड़ा ऊँचा गाया या बजाया जाता है, तो उसे तीव्र स्वर कहा जाता है। 'सा' और 'प' अचल स्वर होते हैं, यानी ये अपनी जगह से कभी नहीं बदलते। वहीं 'रे', 'ग', 'ध', और 'नि' कोमल हो सकते हैं, लेकिन तीव्र होने का गुण केवल 'म' स्वर के पास ही है।

इस प्रकार, 7 शुद्ध स्वर, 4 कोमल स्वर (रे, ग, ध, नि) और 1 तीव्र स्वर (म) मिलकर संगीत के पूरे 12 स्वरों का निर्माण करते हैं। इन स्वरों का सही संतुलन ही किसी भी राग में मिठास और गहराई उत्पन्न करता है।

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