सत्य का स्वाद मीठा है
कई बार हम सुनते हैं कि सत्य कड़वा होता है। लेकिन क्या सच में सत्य कड़वा है? नहीं। सत्य तो मीठा है, बेहद मीठा। जो लोग सत्य को कड़वा कहते हैं, वे अक्सर उससे डरते हैं या उसे झेल नहीं पाते। लेकिन इतिहास और धर्मग्रंथ हमें बताते हैं कि महापुरुषों ने हमेशा सत्य का मार्ग चुना।
सत्य का ज्ञान केवल बोलने से नहीं मिलता। यह ज्ञान मौन साधना से आता है। जब मन शांत होता है, तभी सत्य की आवाज सुनाई देती है। राम, महावीर, पार्श्वनाथ, पांडव – ये सभी सत्य के मार्ग पर चले। अगर सत्य कड़वा होता, तो ये महान आत्माएं उसके पीछे क्यों लगतीं?
सच तो यह है कि सत्य से बड़ा मीठा कोई अनुभव नहीं। वह दर्द भी दे सकता है, लेकिन वह दर्द साफ़ करता है, टूटता है। जैसे घाव को साफ करने में दर्द होता है, लेकिन वही घाव भरता है। उसी तरह सत्य दर्द दे सकता है, लेकिन वही हमें आत्मिक रूप से स्वस्थ भी बनाता है।
हमें भी सत्य को डरकर नहीं, बल्कि प्यार से स्वीकार
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