भारतीय संगीत और सप्तक की 22 श्रुतियां
भारतीय शास्त्रीय संगीत की नींव बेहद गहरी और वैज्ञानिक है। संगीत में स्वर और ताल के साथ-साथ श्रुति का एक अत्यंत महत्वपूर्ण स्थान होता है। सरल शब्दों में कहें तो श्रुति वह सूक्ष्म ध्वनि है जिसे हमारा कान स्पष्ट रूप से सुन सकता है और पहचान सकता है। प्राचीन भारतीय संगीत सिद्धांतों के अनुसार, एक पूरा सप्तक (सा से लेकर नि तक के सातों स्वरों का समूह) कुल 22 श्रुतियों में विभाजित किया गया है।
यह विभाजन गणितीय रूप से पूरी तरह से समान या बराबर दूरी पर नहीं होता। पश्चिमी संगीत (Western Music) से यदि इसकी तुलना की जाए, तो इसे क्वार्टर टोन (quarter tones) के करीब माना जा सकता है। पश्चिमी संगीत सिद्धांत में एक सप्तक में 24 क्वार्टर टोन होते हैं, जबकि हमारे भारतीय संगीत में यह 22 सूक्ष्म आवृत्तियों या श्रुतियों में बंटा होता है।
इन्हीं 22 श्रुतियों में से चुनकर हमारे सात मुख्य स्वर—सा, रे, ग, म, प, ध, नि—बनाए गए हैं। गायक या वादक जब रागों का गायन करते हैं, तो वे इन्हीं श्रुतियों के बारीक अंतर से राग में अलग-अलग भाव और सुंदरता उत्पन्न करते हैं। यही सूक्ष्मता भारतीय संगीत को दुनिया भर के संगीत से अलग और विशिष्ट बनाती है।
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