लचीली और जलवायु-अनुकूल फसलें

बदलते मौसम और बढ़ते तापमान के बीच खेती करना एक बड़ी चुनौती बनता जा रहा है। ऐसे में वैज्ञानिकों और किसानों का ध्यान उन फसलों पर है जो कठिन परिस्थितियों का सामना कर सकें। सबसे प्रमुख और व्यापक रूप से इस्तेमाल की जाने वाली सूखा-सहिष्णु फसल ड्राई-टॉलरेंट मकई (DT मकई) है। इस विशेष किस्म को मुख्य रूप से शुष्क और सूखे जैसी गंभीर स्थितियों में जीवित रहने और पैदावार देने के लिए तैयार किया गया है।

मक्का के अलावा, कई अन्य पौधे भी अपनी असाधारण सहनशीलता के लिए जाने जाते हैं। कृषि और पर्यावरण जानकारों के अनुसार, भिंडी (Okra), मशरूम, शकरकंद (Sweet Potatoes) और अनार (Pomegranates) विभिन्न क्षेत्रों में जलवायु के उतार-चढ़ाव को झेलने में सक्षम हैं। ये फसलें कम पानी और विपरीत परिस्थितियों में भी अच्छी तरह पनप सकती हैं।

दिलचस्प बात यह है कि कुछ ऐसे जंगली पौधे जिन्हें हम अक्सर बेकार घास-फूस या खरपतवार समझकर हटा देते हैं, असल में प्रकृति के सबसे सख्त योद्धा होते हैं। उदाहरण के लिए, डैंडेलियन और बरडॉक जैसे खाद्य खरपतवार इतने मजबूत होते हैं कि इंसानों द्वारा उन्हें मिटाने की तमाम कोशिशों के बावजूद वे जीवित रहते हैं। जैसे-जैसे हमारी धरती गर्म हो रही है, ये अनोखी और सहनशील फसलें आने वाले समय में हमारी खाद्य सुरक्षा के लिए एक बड़ा सहारा साबित हो सकती हैं।

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