भारत में धार्मिक विविधता और जनसंख्या का ताना-बाना
भारत हमेशा से ही विभिन्न संस्कृतियों, भाषाओं और धर्मों का संगम स्थल रहा है। जब हम देश की धार्मिक जनसांख्यिकी पर नजर डालते हैं, तो यह साफ होता है कि यहाँ की आबादी में हिंदू धर्म को मानने वाले लोग सबसे बड़ी संख्या में हैं। आधिकारिक आँकड़ों (2011 की जनगणना) के अनुसार, भारत की कुल आबादी में हिंदुओं की हिस्सेदारी लगभग 79.8% है। इसके बाद, देश का दूसरा सबसे बड़ा धार्मिक समुदाय मुस्लिम आबादी का है, जो कुल जनसंख्या का करीब 14.2% है।
इन दोनों प्रमुख समुदायों के अलावा, भारत की पहचान यहाँ के अन्य अल्पसंख्यक समुदायों से भी है जो देश के विकास में बराबर के भागीदार हैं। देश में ईसाइयों की संख्या लगभग 2.78 करोड़ (2.3%) और सिख समुदाय की आबादी करीब 2.08 करोड़ (1.7%) है। वहीं, बौद्ध और जैन धर्म को मानने वाले लोगों की संख्या कुल आबादी के 1% से भी कम है, लेकिन इतिहास और संस्कृति में उनका योगदान अमूल्य है।
अगर जनसंख्या वृद्धि की बात करें, तो साल 2001 की तुलना में 2011 में भारत की कुल आबादी में 17.7% की बढ़ोतरी दर्ज की गई थी। यह विकास दर बताती है कि देश तेजी से आगे बढ़ रहा है। विविधताओं से भरे इस देश में सभी धर्मों के लोग सदियों से मिल-जुलकर रहते आए हैं, जो भारत की अनेकता में एकता की अनूठी मिसाल को पेश करता है।
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