भारतीय संस्कृति में प्रथम देवता: ब्रह्माजी

सनातन परंपरा और भारतीय दर्शन में जब भी सृष्टि के आरंभ की बात आती है, तो सबसे पहला नाम ब्रह्मा जी का आता है। त्रिदेवों में उन्हें प्रथम स्थान प्राप्त है और उन्हें ही इस संपूर्ण ब्रह्मांड का रचयिता यानी स्त्रष्टा माना जाता है।

वे ही प्रजापति हैं, जिन्होंने जीवों और प्रकृति की रचना की है। प्राचीन ग्रंथों और उपनिषदों में उनके महत्व को बहुत सुंदर तरीके से समझाया गया है। मंडूक उपनिषद् के अनुसार, ब्रह्मा जी को सभी देवताओं में प्रथम, इस जगत का कर्ता और संरक्षक बताया गया है।

धार्मिक मान्यताओं में यह भी माना जाता है कि उनकी मूल इच्छा—एकोऽहं बहु स्याम् (यानी "मैं एक हूँ और बहुत हो जाऊँ")—ही इस पूरी सृष्टि की रचना और इसकी समृद्धि का मुख्य कारण बनी। उनकी इसी संकल्प शक्ति से यह विविधतापूर्ण संसार अस्तित्व में आया।

यह भी देखें

विस्तृत लेख

संबंधित विषय