सरसों का तेल कैसे बनता है?
भारतीय रसोई में सरसों के तेल का एक खास स्थान है। यह न केवल खाने का स्वाद बढ़ाता है, बल्कि सेहत और त्वचा के लिए भी बेहद फायदेमंद माना जाता है। लेकिन क्या आप जानते हैं कि बाजार में मिलने वाला सरसों का तेल असल में तीन अलग-अलग तरीकों से तैयार किया जाता है?
पहला और सबसे आम तरीका है कोल्हू या प्रेशर मशीन द्वारा तेल निकालना। इसमें सरसों के सूखे बीजों को धीरे-धीरे दबाया जाता है, जिससे शुद्ध और गाढ़ा वसायुक्त वनस्पति तेल बाहर निकलता है। इसे हम आमतौर पर 'कच्ची घानी' का तेल भी कहते हैं।
दूसरा तरीका एक विशेष आसवन प्रक्रिया (Distillation Process) है। इसमें सरसों के बीजों को पहले बारीक पीसा जाता है और फिर पानी में मिलाया जाता है। इसके बाद भाप या आसवन के जरिए एक तीखी गंध वाला उड़नशील (Essential) तेल तैयार किया जाता है।
तीसरा तरीका बीजों से बचे हुए हिस्से से सॉल्वेंट निष्कर्षण (Solvent Extraction) विधि द्वारा तेल निकालना है। इस प्रक्रिया से तेल की आखिरी बूंद तक का इस्तेमाल हो जाता है। इस तरह, बीजों की सही गुणवत्ता और बनाने के तरीके से ही तय होता है कि तेल खाने के लिए है या मालिश और अन्य कामों के लिए।
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