फैक्ट्री में सरसों का तेल कैसे बनता है?

हमारे भारतीय घरों के रसोई में सरसों का तेल सबसे अहम माना जाता है। चाहे तीखा अचार बनाना हो या कोई स्वादिष्ट सब्जी, इसके बिना खाना अधूरा सा लगता है। लेकिन क्या आपने कभी सोचा है कि खेतों में लहराने वाली सरसों फैक्ट्री तक पहुँचकर तेल में कैसे बदलती है?

सरसों के तेल की शुरुआत खेतों में पककर तैयार हुई सरसों की फसल से होती है। कटाई के बाद इसके सुनहरे और काले बीजों को अलग करके साफ किया जाता है। इसके बाद इन बीजों को बड़ी-बड़ी फैक्ट्रियों में ले जाया जाता है। फैक्ट्री में सबसे पहले बीजों से धूल और कंकड़ हटाकर उन्हें अच्छी तरह सुखाया जाता है, ताकि तेल की गुणवत्ता बेहतरीन बनी रहे।

साफ-सुथरे बीजों को ऑयल एक्सपेलर मशीनों में डाला जाता है। यहाँ बीजों पर भारी दबाव (दाब) डाला जाता है। इस प्राकृतिक पिसाई और दबाव की प्रक्रिया से बीजों में छिपा शुद्ध तेल बाहर निकल आता है। इस पारंपरिक तरीके से निकाले गए तेल की खुशबू और तीखापन बना रहता है। तेल निकलने के बाद जो सूखा हिस्सा बचता है, उसे खली (Oil Cake) कहा जाता है, जो जानवरों के पौष्टिक चारे के काम आता है।

तेल निकलने के बाद इसे महीन फिल्टरों से गुजारा जाता है ताकि बचा हुआ कचरा अलग हो जाए और एकदम साफ शुद्ध सरसों तेल मिले। सरसों तेल की मात्रा और गुणवत्ता बहुत हद तक इस बात पर निर्भर करती है कि सरसों की किस्म कैसी है और फसल की देखभाल कितनी अच्छी हुई है। अंत में, इस शुद्ध तेल को बोतलों और डिब्बों में पैक करके आपके नजदीकी बाजार तक पहुँचा दिया जाता है।

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