सरसों के तेल की शुद्धता और मिलावट का सच
भारतीय रसोई में सरसों का तेल सदियों से पहली पसंद रहा है। खाने का स्वाद बढ़ाने के साथ-साथ यह सेहत के लिए भी बहुत फायदेमंद माना जाता है। लेकिन आजकल बाजार में बिकने वाले तेल की शुद्धता को लेकर कई सवाल उठते हैं। अक्सर तेल की असली पहचान उसकी तीखी गंध और आंखों में आने वाले पानी से की जाती है, लेकिन क्या आप जानते हैं कि यह तीखापन किसी रसायन की वजह से भी हो सकता है?
सरसों के तेल में मिलने वाली खास तीखी खुशबू और झाग के लिए एलिल आइसोथायोसाइनेट (Allyl Isothiocyanate) नाम का केमिकल जिम्मेदार होता है। यह एक रंगहीन रासायनिक यौगिक (Chemical Compound) है जिसमें सल्फर की मात्रा होती है। प्राकृतिक रूप से सरसों के बीजों को पीसने पर भी यह तत्व बनता है, लेकिन मुनाफा कमाने के लिए कुछ मिलावटखोर इसे ऊपर से नकली या सस्ते तेलों में मिला देते हैं।
इस केमिकल की मिलावट इतनी सफाई से की जाती है कि सामान्य आंखों से देखकर असली और नकली तेल में अंतर करना बेहद मुश्किल हो जाता है। मिलावटी तेल की तीखी गंध आपको धोखा दे सकती है कि तेल एकदम शुद्ध है।
ऐसे में सेहत की सुरक्षा के लिए केवल खुशबू पर भरोसा न करें। हमेशा भरोसेमंद ब्रांड्स या एगमार्क (AGMARK) प्रमाणित सरसों तेल ही खरीदें। अगर संभव हो तो अपनी आंखों के सामने कोल्हू से निकला शुद्ध तेल ही इस्तेमाल करें।
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