ससुराल पक्ष और ज्योतिष: क्या कहते हैं ग्रह?

शादी के बाद हर नई दुल्हन के लिए ससुराल पक्ष के साथ संबंध बहुत महत्व रखते हैं। कई बार मनमुटाव या तनाव की स्थिति भी पैदा हो जाती है। ऐसे में ज्योतिष के आधार पर कुछ संकेतों को समझकर पहले से ही तैयारी की जा सकती है।

कुंडली में सप्तम भाव जीवनसाथी का स्थान माना जाता है। इस सप्तम भाव से गिनने पर चौथा भाव, यानी दशम भाव, सासू माँ का स्थान होता है। इस भाव में विराजमान ग्रहों की प्रकृति से उनके स्वभाव के बारे में अंदाज़ा लगाया जा सकता है।

अगर दशम भाव में शुभ ग्रह—जैसे शुक्र या बृहस्पति—स्थित हों, तो सासू माँ का व्यवहार सहज, समझदार और सहयोगी होता है। लेकिन यदि वहाँ शनि, राहु या मंगल जैसे तीक्ष्ण ग्रह रहें, तो संबंधों में तनाव या दबाव की स्थिति भी बन सकती है।

हालाँकि, ज्योतिष केवल संकेत देता है, नियति नहीं। समझदारी, सहनशीलता और अच्छी संवाद कौशल से कई चुनौतियों को दूर किया जा सकता है। इसलिए, ससुराल पक्ष के स

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