हनुमान जी के पुत्र मकरध्वज की अनोखी कथा
सनातन धर्म में हनुमान जी को बाल ब्रह्मचारी माना गया है, लेकिन बेहद कम लोग जानते हैं कि उनका एक पुत्र भी था, जिनका नाम मकरध्वज था। पौराणिक कथाओं के अनुसार, मकरध्वज का जन्म किसी पारंपरिक तरीके से नहीं, बल्कि एक बेहद अनोखी घटना के कारण हुआ था।
जब हनुमान जी ने लंका दहन किया, तब तीव्र अग्नि के कारण वे पूरी तरह पसीने से लथपथ हो गए थे। अपनी पूंछ की आग बुझाने और खुद को शांत करने के लिए जब वे समुद्र के ऊपर पहुंचे, तो उनके शरीर से पसीने की एक बूंद गहरे पानी में टपक गई। उस समय समुद्र में मौजूद एक विशाल मछली ने उस पसीने की बूंद को निगल लिया। इसी पसीने के प्रभाव से वह मछली गर्भवती हो गई और बाद में उसने मकरध्वज को जन्म दिया। मकरध्वज हनुमान जी की तरह ही अत्यंत बलवान और पराक्रमी थे।
इसके अलावा, हनुमान जी के जीवन से जुड़े कई अन्य रहस्य भी ग्रंथों में मिलते हैं। आमतौर पर लोग उन्हें केवल ब्रह्मचारी रूप में पूजते हैं, लेकिन पाराशर संहिता में हनुमान जी के विवाहित होने का भी स्पष्ट प्रमाण मिलता है। इस ग्रंथ के अनुसार, सूर्य देव से अपनी शिक्षा पूरी करने के लिए एक विशेष परिस्थिति में हनुमान जी का विवाह सूर्य-पुत्री सुवर्चला के साथ हुआ था। हालांकि, विवाह के तुरंत बाद सुवर्चला तपस्या में लीन हो गईं, जिससे हनुमान जी का ब्रह्मचर्य हमेशा अक्षुण्ण रहा।
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