हम भगवान को क्यों नहीं देख पाते?

कई बार हम सोचते हैं कि अगर भगवान को आँखों से देख लें, तो शायद इतना संदेह न होता। लेकिन सच तो यह है कि भगवान ने हमें देखने के बजाय विश्वास करने की शक्ति दी है। एक प्रश्नचिह्न के जवाब में कहा गया था कि हम भगवान को इसलिए नहीं देख सकते क्योंकि अगर हम किसी को देख लें, तो उस पर विश्वास करना आसान हो जाता है।

भगवान चाहता है कि हम मजबूत बनें।

वह चाहता है कि हम आँखों के बजाय दिल से देखें। विश्वास की आँखों से देखें। यही विश्वास हमें आस्था की गहराई तक ले जाता है। 5 मार्च 2012 को एक अंग्रेजी समाचार पत्र में छपे उत्तर में कहा गया था – “भगवान चाहता है कि हम देखे बिना भी विश्वास करें।”

यह विश्वास कोई कमजोरी नहीं, बल्कि आत्मिक ताकत की पहचान है। जब हम अपने दुखों में भी उस पर भरोसा रखते हैं, तो वह भरोसा ही हमारी आस्था बन जाता है। भगवान को न देख पाना शायद एक परीक्षा है – विश्वास की परीक्षा।

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