भारतीय संगीत और स्वरों का जादू

संगीत हमारे जीवन में मिठास और मानसिक शांति घोलने का एक माध्यम है। भारतीय शास्त्रीय संगीत की नींव मुख्य रूप से सात मुख्य स्वरों पर टिकी हुई है। इन सात बुनियादी स्वरों को संक्षेप में सा, रे, ग, म, प, ध, और नि कहा जाता है। इन्हें सामूहिक रूप से 'सप्तक' के नाम से जाना जाता है।

गायकों और साधकों के अभ्यास में हाथों का बहुत बड़ा योगदान होता है। जब भी कोई गायक ताल और सुर साधता है, तो हाथ की उंगलियों की मुद्राओं और हरकतों से स्वरों की ऊँचाई और लय का सही अंदाज लगाया जाता है। संगीत अभ्यास में इन सात स्वरों को सही सुर में गाना और हाथ के इशारों से समझना ही सुर साधना का आधार बनता है।

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