सौ किलो मूंगफली से आमतौर पर 35 से 50 किलो तक शुद्ध तेल निकाला जा सकता है, जो मुख्य रूप से दाने की गुणवत्ता और उसकी किस्म पर निर्भर करता है। कृषि बाजार में जब किसान और व्यापारी इस सवाल का सामना करते हैं, तो उनके मन में सबसे पहले यही जिज्ञासा होती है कि लागत के मुकाबले कितना मुनाफा मिलेगा। मूंगफली भारत में बड़े पैमाने पर उगाई जाने वाली एक प्रमुख तिलहन फसल है, जिसका उपयोग घरेलू रसोई से लेकर बड़े उद्योगों तक में बड़े पैमाने पर किया जाता है। इस लेख में हम इसी बात की गहराई से पड़ताल करेंगे कि तेल की मात्रा पर कौन-से कारक सीधा असर डालते हैं।

मूंगफली से तेल की मात्रा के मुख्य आंकड़े और डेटा

उत्पादकता के लिहाज से देखा जाए तो हर किस्म की मूंगफली में तेल का प्रतिशत एक समान नहीं होता है। यदि आप बाजार से अच्छी गुणवत्ता वाली सूखी मूंगफली खरीदते हैं, तो उसमें तेल की मात्रा लगभग 40 प्रतिशत से 45 प्रतिशत के आसपास पाई जाती है। इसका सीधा गणित यह है कि आधुनिक एक्सपेलर मशीनों या कोल्हू के जरिए पेरने पर 100 किलोग्राम मूंगफली से औसतन 40 से 42 लीटर यानी किलोग्राम तेल आसानी से प्राप्त हो जाता है। बाकी बचा हुआ हिस्सा खल के रूप में निकलता है, जिसका इस्तेमाल पशुओं के चारे और जैविक खाद के रूप में धड़ल्ले से किया जाता है। तेल की यह मात्रा इस बात पर भी टिकी होती है कि मूंगफली में नमी की मात्रा कितनी है। अगर दाने में जरूरत से ज्यादा नमी या सीलन है, तो तेल का यह आंकड़ा घटकर 30 से 35 किलो तक भी सिमट सकता है। इसके अलावा, स्थानीय जलवायु, मिट्टी का प्रकार और सिंचाई के तरीके भी इस प्रतिशत को ऊपर-नीचे करने में अहम भूमिका निभाते हैं। किसानों के लिए इन आंकड़ों को समझना बेहद जरूरी है ताकि वे कटाई और भंडारण के दौरान सही फैसले ले सकें और किसी भी तरह के नुकसान से बच सकें।

तेल निकालने के पारंपरिक और आधुनिक तरीकों की तुलना

मूंगफली से तेल प्राप्त करने के लिए मुख्य रूप से दो प्रमुख तरीकों का इस्तेमाल किया जाता है, जिनमें पारंपरिक कच्ची घानी (कोल्हू) और आधुनिक मैकेनिकल एक्सपेलर मशीन शामिल हैं। दोनों पद्धतियों के अपने फायदे और नुकसान हैं, जो तेल की गुणवत्ता और मात्रा दोनों को सीधे तौर पर प्रभावित करते हैं। पारंपरिक कोल्हू विधि में मूंगफली के दानों को धीमी गति से पीसा जाता है, जिससे घर्षण के कारण बहुत कम गर्मी पैदा होती है। इस ठंडी प्रक्रिया की वजह से तेल अपने प्राकृतिक पोषक तत्वों, सोंधी खुशबू और मूल स्वाद को पूरी तरह से बरकरार रखता है। हालांकि, इस पुरानी तकनीक में 100 किलो मूंगफली से निकलने वाले तेल की मात्रा थोड़ी कम यानी लगभग 35 से 38 किलो तक ही सीमित रह जाती है, क्योंकि दाने के अंदर कुछ अंश खल में ही रह जाते हैं। इसके विपरीत, आधुनिक एक्सपेलर और हाइड्रोलिक मशीनें उच्च दबाव और तीव्र गति से काम करती हैं। यह तकनीक दाने के अंदर छिपे तेल के हर एक बूंद को निचोड़ लेती है, जिससे 100 किलो मूंगफली से 45 से 48 किलो तक तेल निकल आता है। लेकिन इस हाई-स्पीड प्रक्रिया में अत्यधिक गर्मी उत्पन्न होने के कारण तेल के कई प्राकृतिक गुण और विटामिंस नष्ट हो जाते हैं। व्यावसायिक स्तर पर व्यापारी अधिकतम मुनाफे के लिए आधुनिक मशीनों को प्राथमिकता देते हैं, जबकि शुद्धता और स्वास्थ्य के प्रति जागरूक लोग आज भी पारंपरिक रूप से निकाले गए तेल पर ही भरोसा करते हैं।

सावधानियां और वह सब जो प्रक्रिया के दौरान गलत हो सकता है

तेल निकालने की इस पूरी प्रक्रिया में जरा सी लापरवाही भारी वित्तीय नुकसान का सबब बन सकती है। सबसे बड़ी समस्या मूंगफली का गलत भंडारण है; यदि दानों को गोदाम में रखते समय उनमें नमी रह जाती है, तो फफूंद यानी एस्परगिलस फ्लेवस पनपने का खतरा कई गुना बढ़ जाता है। यह खतरनाक फफूंद न केवल तेल की गुणवत्ता को पूरी तरह से बर्बाद कर देती है, बल्कि उससे निकलने वाले टॉक्सिन स्वास्थ्य के लिए भी अत्यंत घातक साबित होते हैं। इसके अलावा, पेराई करते वक्त तापमान का नियंत्रण बहुत जरूरी है। यदि मशीन बहुत अधिक गर्म हो जाए, तो तेल का रंग गहरा हो जाता है और उसमें कड़वाहट आ जाती है, जिससे बाजार में उसकी कीमत गिर जाती है। कई बार किसान जल्दबाजी में ऐसी मूंगफली को पेरने के लिए भेज देते हैं जो अंदर से पूरी तरह परिपक्व नहीं होती, जिससे तेल का उत्पादन और खल की गुणवत्ता दोनों बेहद खराब हो जाते हैं। इन तमाम विसंगतियों से बचने के लिए यह अत्यंत आवश्यक है कि पेराई से पहले दानों की अच्छी तरह से छंटाई की जाए, उनकी नमी की सटीक जांच हो और केवल प्रमाणित तथा भरोसेमंद मिलों या मशीनों का ही उपयोग किया जाए ताकि मेहनत और पूंजी दोनों सुरक्षित रहें।

एक कम ज्ञात तथ्य जिसे ज्यादातर लोग नजरअंदाज कर देते हैं

मूंगफली से तेल निकालने की प्रक्रिया यानी पेरने के दौरान एक बहुत ही महत्वपूर्ण बात पर अक्सर लोगों का ध्यान नहीं जाता है, और वह है 'घानी' या 'कोल्ड प्रेस' (Cold Press) तकनीक का महत्व। बाजार में मिलने वाला अधिकतर कमर्शियल तेल रिफाइंड होता है, जिसे उच्च तापमान और केमिकल सॉल्वेंट (जैसे hexane) के जरिए निकाला जाता है। इस आधुनिक और तेज प्रक्रिया में मूंगफली के प्राकृतिक पोषक तत्व, विटामिन-ई और उसकी असली सुगंध नष्ट हो जाती है। इसके विपरीत, पारंपरिक लकड़ी की घानी में जब 100 किलो मूंगफली को पेरा जाता है, तो तापमान नियंत्रित रहता है, जिससे तेल अपने मूल रूप और औषधीय गुणों को बचाए रखता है। दूसरा छिपा हुआ तथ्य यह है कि तेल निकालने के बाद जो खली (Oil Cake) बचती है, वह केवल कचरा नहीं है, बल्कि उसमें लगभग 7 से 8 प्रतिशत तक उच्च गुणवत्ता वाला अवशिष्ट तेल और भरपूर प्लांट-बेस्ड प्रोटीन होता है। किसान भाई या पशुपालक इस खली को पशुओं के आहार में मिलाकर दूध की गुणवत्ता और मात्रा दोनों को काफी हद तक बढ़ा सकते हैं। इसलिए, केवल तेल की मात्रा पर ध्यान न देकर उसकी शुद्धता और मिलने वाले सह-उत्पादों के सही उपयोग पर भी विचार करना चाहिए।

अक्सर पूछे जाने वाले सवाल

क्या घर पर निकाली गई मूंगफली की घानी का तेल ज्यादा फायदेमंद होता है?

हाँ, पारंपरिक तरीके से निकाली गई घानी का तेल पूरी तरह शुद्ध होता है और इसमें किसी भी तरह के हानिकारक केमिकल्स या प्रिजर्वेटिव्स का इस्तेमाल नहीं किया जाता है, जिससे यह सेहत के लिए अधिक गुणकारी होता है।

क्या 100 किलो मूंगफली से निकलने वाले तेल की मात्रा हर बार एक जैसी होती है?

नहीं, तेल की मात्रा मूंगफली की वेरायटी, उसमें मौजूद नमी की मात्रा और उसकी पैदावार पर निर्भर करती है, इसलिए हर बार परिणाम में थोड़ा अंतर आ सकता है।

मूंगफली के तेल की शेल्फ लाइफ (Shelf Life) को कैसे बढ़ाया जा सकता है?

तेल को हमेशा ठंडी, सूखी और अंधेरी जगह पर एयर-टाइट कांच के या स्टील के कंटेनर में बंद करके रखना चाहिए, ताकि वह सीधी धूप और हवा के संपर्क में आने से खराब न हो।

तेल निकालने के बाद बची हुई खली का सबसे अच्छा उपयोग क्या है?

बची हुई खली का उपयोग मुख्य रूप से दुधारू पशुओं के पौष्टिक आहार के रूप में और खेतों में जैविक खाद (Organic Manure) के तौर पर मिट्टी की उर्वरता बढ़ाने के लिए किया जाता है।

निष्कर्ष और हमारी सलाह

यदि आप शुद्धता और बेहतर स्वास्थ्य को प्राथमिकता देते हैं, तो हमेशा भरोसेमंद स्रोतों से पारंपरिक रूप से निकाली गई मूंगफली के तेल का ही चयन करें। हमारा स्पष्ट रुख यह है कि व्यावसायिक रूप से मिलने वाले रिफाइंड तेलों की जगह ठंडी घानी के शुद्ध मूंगफली तेल को अपनाना आपके और आपके परिवार के लंबे समय के स्वास्थ्य के लिए एक समझदारी भरा और लाभकारी निवेश है।