आश्चर्यजनक रूप से, वैश्विक बौद्धिक संपदा संगठन (WIPO) द्वारा जारी ग्लोबल इनोवेशन इंडेक्स 2022 में भारत ने एक बड़ी छलांग लगाते हुए 40 वां स्थान हासिल किया, जो देश की तकनीकी और वैज्ञानिक प्रगति का एक स्पष्ट प्रमाण है। यह सूचकांक दुनिया भर की अर्थव्यवस्थाओं की नवाचार क्षमताओं का मूल्यांकन करता है। प्रौद्योगिकी में भारत का रैंक 2022 क्या है, यह सवाल आज हर उस व्यक्ति के मन में है जो तकनीकी विकास के इस दौर में देश की स्थिति का सटीक आंकलन करना चाहता है।

प्रौद्योगिकी और नवाचार सूचकांक की ऐतिहासिक पृष्ठभूमि और विकास यात्रा

किसी भी देश की तकनीकी क्षमता रातों-रात नहीं बनती, बल्कि इसके पीछे दशकों के नीतिगत बदलाव और अकादमिक प्रयास छिपे होते हैं। ऐतिहासिक रूप से, विकासशील देशों के लिए वैश्विक सूचकांकों में अपनी जगह बनाना एक कठिन चुनौती रहा है क्योंकि शुरुआती दौर में पारंपरिक ढांचे और सीमित पूंजी निवेश मुख्य बाधा हुआ करते थे। परंतु, समय के साथ इस परिदृश्य में आमूल-चूल परिवर्तन आया है। यदि हम पीछे मुड़कर देखें, तो भारत ने वैश्विक मंच पर अपनी तकनीकी स्थिति को सुदृढ़ करने के लिए कई महत्वपूर्ण कदम उठाए हैं। सरकार और निजी क्षेत्र के संयुक्त प्रयासों ने अनुसंधान और विकास के क्षेत्र में एक नई चेतना जगाई है। शैक्षणिक संस्थानों में शोध की संस्कृति को बढ़ावा देने के लिए अटल इनक्यूबेशन सेंटर और विभिन्न तकनीकी मिशनों की शुरुआत की गई। इन ऐतिहासिक पहलों ने न केवल स्थानीय स्तर पर तकनीकी प्रतिभाओं को उभारा, बल्कि वैश्विक निवेशकों का ध्यान भी आकर्षित किया। यही कारण है कि पिछले कुछ वर्षों में भारत की रैंकिंग में निरंतर सुधार देखा गया है और 2022 में यह शीर्ष 40 देशों की सूची में शामिल होने में सफल रहा।

प्रौद्योगिकी मूल्यांकन और रैंकिंग का चरणबद्ध कार्यप्रणाली तंत्र

वैश्विक स्तर पर किसी भी देश की तकनीकी स्थिति का आकलन करने के लिए एक बेहद जटिल और पारदर्शी कार्यप्रणाली का पालन किया जाता है। इस प्रक्रिया को समझने के लिए हमें इसके विभिन्न चरणों का गहराई से विश्लेषण करना होगा। सबसे पहले, दुनिया भर के डेटा को इकट्ठा करने के लिए विभिन्न संकेतकों जैसे कि सूचना और संचार प्रौद्योगिकी (ICT) अवसंरचना, पेटेंट आवेदन, और उच्च तकनीक निर्यात का उपयोग किया जाता है। पहले चरण में, विश्व बौद्धिक संपदा संगठन जैसे संस्थान संबंधित देशों से आधिकारिक आंकड़े प्राप्त करते हैं और उनकी प्रामाणिकता की जांच करते हैं। दूसरे चरण में, इन आंकड़ों को संस्थानों, मानव पूंजी, अनुसंधान, अवसंरचना और बाजार परिपक्वता जैसे प्रमुख स्तंभों के अंतर्गत वर्गीकृत किया जाता है। तीसरे चरण में, इन सभी स्तंभों के आधार पर प्रत्येक देश को एक विशिष्ट स्कोर प्रदान किया जाता है, जो उनकी समग्र नवाचार क्षमता को दर्शाता है। चौथे और अंतिम चरण में, इन सभी गणनाओं के बाद वैश्विक रैंकिंग प्रकाशित की जाती है। भारत के मामले में, आईसीटी सेवाओं के निर्यात और विज्ञान व इंजीनियरिंग स्नातकों की उच्च संख्या ने इस पूरी कार्यप्रणाली में देश के स्कोर को काफी ऊपर उठाया है।

एक मूर्त उदाहरण और तकनीकी परिवर्तन का वास्तविक केस स्टडी

सिद्धांतों और आंकड़ों से परे, यदि हमें यह देखना हो कि यह तकनीकी प्रगति जमीन पर कैसे काम करती है, तो हमें डिजिटल भुगतान के क्षेत्र में भारत के अभूतपूर्व बदलाव का अध्ययन करना होगा। यूनिफाइड पेमेंट इंटरफेस यानी यूपीआई (UPI) इसका एक सजीव और ठोस उदाहरण है। कुछ साल पहले तक नकद लेनदेन ही देश की अर्थव्यवस्था का मुख्य आधार था, जिससे छोटे व्यापारियों और आम जनता को तमाम तरह की अड़चनों का सामना करना पड़ता था। लेकिन तकनीकी नवाचार और मजबूत डिजिटल बुनियादी ढांचे के दम पर, भारत ने एक ऐसा रियल-टाइम पेमेंट सिस्टम तैयार किया जिसने पूरी दुनिया को हैरान कर दिया। आज स्थिति यह है कि देश के दूर-दराज के गाँवों में एक छोटा चाय विक्रेता भी क्यूआर कोड के माध्यम से सेकंडों में भुगतान स्वीकार कर रहा है। यह तकनीकी छलांग न केवल आम नागरिकों के जीवन को सहज बना रही है, बल्कि यह भी साबित करती है कि भारत वैश्विक तकनीकी सूचकांकों में क्यों लगातार ऊपर उठ रहा है।

What experts say about it

देश और दुनिया के तकनीकी विशेषज्ञों का मानना है कि वर्ष 2022 में वैश्विक नवाचार सूचकांक (Global Innovation Index) में भारत का 40वें स्थान पर पहुंचना एक ऐतिहासिक मील का पत्थर है। विशेषज्ञों के अनुसार, भारत ने यह छलांग अपनी मजबूत आईटी सेवाओं, सूचना और संचार प्रौद्योगिकी (ICT) निर्यात और स्टार्टअप इकोसिस्टम के दम पर लगाई है। आर्थिक मामलों और विज्ञान नीति के जानकारों का कहना है कि सरकार द्वारा शुरू की गई डिजिटल पहलों और पेटेंट फाइलिंग में आई तेजी ने देश की तकनीकी छवि को पूरी तरह बदल दिया है। हालांकि, कई तकनीकी विश्लेषकों का यह भी सुझाव है कि बुनियादी ढांचे और अनुसंधान एवं विकास (R&D) पर खर्च को और अधिक बढ़ाने की आवश्यकता है, ताकि वैश्विक स्तर पर शीर्ष अर्थव्यवस्थाओं को कड़ी टक्कर दी जा सके। विशेषज्ञों का पूर्ण विश्वास है कि यदि इसी प्रकार युवा प्रतिभाओं को प्रोत्साहन मिलता रहा, तो आने वाले वर्षों में भारत वैश्विक प्रौद्योगिकी मानचित्र पर और अधिक प्रभावशाली भूमिका निभाएगा।

Frequently Asked Questions

प्रश्न 1: वर्ष 2022 में वैश्विक नवाचार सूचकांक (GII) में भारत की रैंकिंग क्या थी?

उत्तर: वर्ष 2022 में विश्व बौद्धिक संपदा संगठन (WIPO) द्वारा जारी वैश्विक नवाचार सूचकांक में भारत 132 अर्थव्यवस्थाओं में से 40वें स्थान पर था, जो पिछले वर्ष के मुकाबले एक महत्वपूर्ण सुधार दर्शाता है।

प्रश्न 2: भारत की इस तकनीकी प्रगति में किन क्षेत्रों का सबसे बड़ा योगदान रहा है?

उत्तर: इस प्रगति में मुख्य रूप से आईसीटी (ICT) सेवाओं के निर्यात, विज्ञान और इंजीनियरिंग स्नातकों की संख्या, वेंचर कैपिटल फाइनेंसिंग और तेजी से बढ़ते हुए स्टार्टअप एवं यूनिकॉर्न इकोसिस्टम का सबसे बड़ा योगदान रहा है।

What if India's technological rise completely reshapes the global digital economy faster than anyone anticipated?