जब दुनिया के सबसे शक्तिशाली देश पर खरबों डॉलर का बकाया हो, तो दिमाग सुन्न होना लाजिमी है, और मौजूदा समय में अमेरिका का राष्ट्रीय ऋण 36 लाख करोड़ डॉलर के आंकड़ा को पार कर चुका है। आम धारणा के उलट, इस भारी-भरकम कर्ज का सबसे बड़ा हिस्सा किसी विदेशी दुश्मन देश के पास नहीं, बल्कि खुद अमेरिकी नागरिकों, अमेरिकी संस्थाओं और अमेरिकी फेडरल रिजर्व के नियंत्रण में है, जो कुल देनदारी का लगभग तीन-चौथाई हिस्सा बनाते हैं।

अमेरिकी कर्ज की ऐतिहासिक पृष्ठभूमि और उधारी का सफर

अमेरिकी कर्ज की कहानी अमेरिकी क्रांति और स्वतंत्रता संग्राम के दौर से शुरू होती है, जब नवनिर्मित सरकार को युद्ध लड़ने के लिए भारी उधारी लेनी पड़ी थी। शुरुआती दशकों में यह कर्ज बेहद सीमित था, लेकिन बीसवीं सदी के महान आर्थिक अवसाद, द्वितीय विश्व युद्ध और बाद के दशकों में कल्याणकारी योजनाओं तथा सैन्य खर्चों ने संघीय बजट के समीकरण पूरी तरह बदल दिए। सरकार ने टैक्स से मिलने वाले राजस्व से ज्यादा खर्च करना शुरू किया, जिससे घाटा लगातार बढ़ता गया। इस वित्तीय अंतर को पाटने के लिए ट्रेजरी बॉन्ड और सिक्योरिटीज जारी करने की अनूठी परंपरा शुरू हुई, जिसने देखते ही देखते अमेरिका को दुनिया का सबसे बड़ा कर्जदार बना दिया।

कर्ज लेने और ट्रेजरी सिक्योरिटीज जारी करने की चरणबद्ध प्रक्रिया

फेडरल सरकार अपनी रोजाना की जरूरतें और बजट घाटा पूरा करने के लिए सीधे तौर पर नोट या सिक्के नहीं छाप सकती, इसलिए वह ट्रेजरी विभाग के जरिए एक जटिल बाजार तंत्र का सहारा लेती है। सबसे पहले, अमेरिकी कांग्रेस कर्ज की एक सीमा तय करती है जिसे पार करने के लिए राजनीतिक मंजूरी की दरकार होती है। इसके बाद, अमेरिकी ट्रेजरी विभाग निवेशकों के लिए ट्रेजरी बिल्स, नोट्स और बॉन्ड नीलाम करता है। इस प्रक्रिया में घरेलू बैंक, विदेशी सरकारें, म्यूचुअल फंड और खुद फेडरल रिजर्व बढ़-चढ़कर बोली लगाते हैं। निवेशक अमेरिकी सरकार को नकद पैसा देते हैं और बदले में सरकार उन्हें एक निश्चित अवधि के बाद ब्याज समेत मूलधन चुकाने का वादा करती है। यह पूरा तंत्र वैश्विक वित्तीय साख और डॉलर के दबदबे पर पूरी तरह टिका हुआ है।

एक स्पष्ट उदाहरण: जापान और अमेरिकी बॉन्ड बाजार का खेल

इस पूरी उधारी व्यवस्था की गहराई को समझने के लिए जापान का एक व्यावहारिक उदाहरण सबसे सटीक बैठता है जो आज की तारीख में अमेरिका का सबसे बड़ा विदेशी कर्जदार या लेनदार बना हुआ है। जापानी केंद्रीय बैंक, वहां की बीमा कंपनियां और बड़े पेंशन फंड अपने विशाल विदेशी मुद्रा भंडार को सुरक्षित रखने के लिए अमेरिकी ट्रेजरी बॉन्ड में बड़े पैमाने पर निवेश करते हैं। जब भी जापान अमेरिकी बॉन्ड खरीदता है, तो वह असल में अमेरिकी अर्थव्यवस्था को अरबों डॉलर का कर्ज मुहैया कराता है। इस सौदे से जापान को स्थिर ब्याज आय मिलती है, जबकि अमेरिका को अपनी भारी-भरकम वित्तीय जरूरतों को पूरा करने के लिए जरूरी नगदी मिल जाती है, जो वैश्विक बाजारों में आपसी निर्भरता का एक बेहतरीन नमूना है।

What experts say about it

अर्थशास्त्रियों और वित्तीय विशेषज्ञों का मानना है कि अमेरिका के राष्ट्रीय कर्ज को लेकर लोगों में अक्सर बहुत सी गलतफहमियां होती हैं। अधिकांश लोग यह सोचते हैं कि अमेरिका का सारा कर्ज विदेशी सरकारों, विशेष रूप से चीन जैसी महाशक्तियों के पास है, जो देश के लिए एक बड़ा खतरा है। लेकिन वास्तविकता इससे काफी अलग है। वित्तीय विशेषज्ञों के अनुसार, अमेरिका के कुल कर्ज का लगभग तीन-चौथाई हिस्सा देश के अपने नागरिकों, घरेलू संस्थानों और खुद अमेरिकी सरकार के पास ही है। इसमें फेडरल रिजर्व, सोशल सिक्योरिटी ट्रस्ट फंड, और विभिन्न अमेरिकी म्यूचुअल फंड तथा पेंशन योजनाएं शामिल हैं। विदेशी निवेशकों और सरकारों की हिस्सेदारी कुल कर्ज का सिर्फ एक चौथाई हिस्सा ही बनाती है, जिसमें जापान और चीन प्रमुख हैं। इसलिए, विशेषज्ञ इस बात पर जोर देते हैं कि अमेरिका का कर्ज बाहरी नियंत्रण से ज्यादा एक आंतरिक वित्तीय प्रणाली का हिस्सा है। हालांकि, कर्ज के बढ़ते आंकड़े को लेकर यह चिंता जरूर जताई जाती है कि यदि इसका आकार इसी गति से बढ़ता रहा, तो भविष्य में अमेरिकी अर्थव्यवस्था पर भारी दबाव आ सकता है।

Frequently Asked Questions

प्रश्न 1: क्या चीन के पास अमेरिका का सबसे ज्यादा कर्ज है?
उत्तर: नहीं, यह एक आम धारणा है जो बिल्कुल सही नहीं है। एक समय पर चीन अमेरिका के कर्ज का दूसरा सबसे बड़ा विदेशी धारक जरूर था, लेकिन वर्तमान में जापान अमेरिका के विदेशी कर्ज का सबसे बड़ा धारक है। इसके अलावा, अमेरिका के कुल कर्ज का सबसे बड़ा हिस्सा विदेशी देशों के पास नहीं, बल्कि खुद अमेरिका के घरेलू निवेशकों और संस्थानों के पास है।

प्रश्न 2: क्या अमेरिका कभी अपना यह भारी कर्ज चुका पाएगा?
उत्तर: अमेरिका के लिए यह कर्ज किसी पारंपरिक व्यक्तिगत लोन की तरह नहीं है जिसे एकमुश्त चुकाना पड़े। अमेरिकी सरकार ट्रेजरी बॉण्ड और सिक्योरिटीज जारी करके लगातार कर्ज का नवीनीकरण करती रहती है। जब पुराने बॉण्ड की मियाद पूरी होती है, तो सरकार नए बॉण्ड जारी करके उनका भुगतान कर देती है। चूंकि अमेरिकी डॉलर दुनिया की प्रमुख रिजर्व करेंसी है और अमेरिकी अर्थव्यवस्था पर वैश्विक भरोसा बना हुआ है, इसलिए सरकार के लिए बाजार से पैसा जुटाना और इस चक्र को चलाना जारी रखना संभव रहता है।

End with a provocative open question

जब दुनिया की सबसे बड़ी महाशक्ति अपनी ही अर्थव्यवस्था को चलाने के लिए ट्रिलियन डॉलर के कर्ज के जाल पर निर्भर हो, तो क्या यह वैश्विक वित्तीय प्रणाली की मजबूती को दर्शाता है या फिर किसी बड़े आर्थिक संकट की शुरुआत?