इस्लामी धर्म और तौहीद (ईश्वर की एकात्मकता) के मूल सिद्धांतों के अनुसार, अल्लाह (ईश्वर) के माता-पिता या परिवार का कोई भी सदस्य नहीं है। अल्लाह तआला हर प्रकार की मानवीय कमियों, जरूरतों और रिश्तों से पूरी तरह मुक्त और परे हैं।

पवित्र कुरान में इस विषय पर अत्यंत स्पष्ट और निर्णायक मार्गदर्शन दिया गया है। विशेष रूप से सूरह अल-इख्लास (अध्याय 112) को इस्लाम में ईश्वर के स्वरूप को समझने का मुख्य आधार माना जाता है। इस छोटी सी सूरह में अल्लाह तआला ने अपने परिचय के बारे में स्वयं फरमाया है:

"कहिए: वह अल्लाह एक है। अल्लाह बेनियाज (निरपेक्ष, जिससे सब मोहताज हैं और जो किसी का मोहताज नहीं) है। न उसने किसी को जना है और न वह किसी से जना गया है। और न ही उसके बराबर का कोई एक भी है।'"

तौहीद की अवधारणा और मानवीय गुणों से मुक्ति

इस्लाम में ईश्वर की परिकल्पना को 'तौहीद' कहा जाता है, जिसका अर्थ है कि अल्लाह अपनी जात (अस्तित्व) और अपने गुणों में अकेला है।

  1. सृष्टिकर्ता और रचना: दुनिया की हर चीज़—चाहे वह अंतरिक्ष हो, जीव-जंतु हों, या मनुष्य—अल्लाह की रचना (मखलूक) हैं। माता-पिता और परिवार का होना जैविक जीवों की विशेषता है, जो प्रजनन और शारीरिक विकास पर आधारित होती है। चूंकि अल्लाह किसी जीव की तरह भौतिक शरीर या योनि से उत्पन्न नहीं हुआ, इसलिए उसके माता-पिता होने का सवाल ही उत्पन्न नहीं होता।

  2. "न उसने किसी को जना और न वह जना गया": पवित्र कुरान की यह आयत इस बात का सबसे बड़ा प्रमाण है कि अल्लाह का न तो कोई बेटा या बेटी है (वह किसी को नहीं जनता) और न ही उसके माता-पिता या पूर्वज हैं (वह किसी से नहीं जना गया है)।

ऐतिहासिक रूप से, जब पैगंबर मुहम्मद के दौर में विभिन्न समुदायों द्वारा अल्लाह के वंश या परिवार के बारे में सवाल उठाए गए थे, तब इस सूरह का अवतरण हुआ था ताकि इंसानी सोच (जो ईश्वर को भी इंसानों की तरह पारिवारिक बंधनों में देखना चाहती थी) को दुरुस्त किया जा सके और ईश्वर की सर्वोच्चता व पवित्रता को स्थापित किया जा सके।

इस्लाम धर्म की मूल मान्यताओं और पवित्र कुरआन के अनुसार, अल्लाह (ईश्वर) एक ही है, और वह तमाम कायनात का रचनाकार तथा पालनहार है। अल्लाह की ذات (अस्तित्व) इंसानी और सांसारिक सीमाओं से पूरी तरह परे है।

अल्लाह के संबंध में मुख्य बातें:

  • अजन्म और अनादि: इस्लामिक धर्मशास्त्र के अनुसार, अल्लाह का कोई माता-पिता, परिवार या संतान नहीं है। वह न तो किसी से जन्मा है और न ही उसने किसी को जन्म दिया है।

  • मानवीय गुणों से परे: माता-पिता होना, परिवार होना या किसी प्रकार की जैविक जरूरत होना इंसानों और अन्य जीवों की विशेषता है। सृष्टिकर्ता (Creator) अपनी बनाई हुई सृष्टि (Creation) की इन मोहताजों और विशेषताओं से पूरी तरह मुक्त है।

  • कुरआन का स्पष्ट संदेश: पवित्र कुरआन की सूरह अल-इख़्लास (अध्याय 112) में यह बात बहुत स्पष्ट रूप से कही गई है कि "कह दो, वह अल्लाह एक है। अल्लाह निरपेक्ष (बेनियाज़) है। न उसने किसी को जन्म दिया और न वह किसी से जन्मा है, और न ही उसके बराबर का कोई है।"

संक्षेप में कहें तो, अल्लाह का कोई माता-पिता नहीं है, क्योंकि वह स्वयंभू, अनंत और इस पूरी सृष्टि का एकमात्र स्वतंत्र संचालक है।

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