इस्लाम के अंतिम पैगंबर हजरत मुहम्मद साहब के दादा का नाम हजरत अब्दुल मुत्तलिब (Hazrat Abdul Muttalib) था।
हजरत अब्दुल मुत्तलिब का वास्तविक नाम और पैतृक परिचय
इस्लामिक इतिहास की प्रामाणिक किताबों और सीरत की पुस्तकों के अनुसार, हजरत मुहम्मद साहब के दादा का मूल नाम शैबा (Shaybah ibn Hashim) था।
हाशिम वंश मक्का और पूरे अरब क्षेत्र में अपनी मेहमाननवाज़ी, न्यायप्रियता और काबा की देखरेख के लिए विशेष स्थान रखता था। शैबा यानी अब्दुल मुत्तलिब का जन्म मक्का से दूर यसरिब (जो बाद में मदीना कहलाया) में हुआ था, क्योंकि उनकी माता सलमा बिन्त अम्र वहीं के खजराज कबीले से ताल्लुक रखती थीं।
'शैबा' से 'अब्दुल मुत्तलिब' बनने का इतिहास
हजरत अब्दुल मुत्तलिब के जीवन से जुड़ी यह एक बेहद प्रसिद्ध और ऐतिहासिक घटना है कि उनका नाम 'शैबा' से बदलकर 'अब्दुल मुत्तलिब' कैसे पड़ा:
पिता की अकाल मृत्यु: जब शैबा बहुत छोटे थे, तब उनके पिता हाशिम व्यापारिक यात्रा के दौरान गाजा (फिलिस्तीन) में वफात पा गए (उनका इंतकाल हो गया)।
मक्का वापसी: कुछ वर्षों तक यसरिब में अपनी मां के पास रहने के बाद, उनके चाचा मुत्तलिब इब्न अब्द मुनाफ अपने भतीजे शैबा को वापस मक्का लाने के लिए यसरिब गए।
मां की सहमति मिलने के बाद वे शैबा को लेकर मक्का लौटे। नामकरण की भूल: जब चाचा मुत्तलिब अपने भतीजे को घोड़े पर अपने पीछे बैठाकर मक्का की सीमा में दाखिल हुए, तो मक्का के लोगों ने उस अनजान बच्चे को देखा।
उस जमाने में लोगों को यह जानकारी नहीं थी कि यह बच्चा कौन है। कबीले के लोगों ने मुत्तलिब से पूछा कि यह उनके साथ कौन है?
चूंकि मुत्तलिब यह जाहिर नहीं करना चाहते थे कि वह उनका भतीजा है (या उस समय के सामाजिक परिवेश के तहत उन्होंने उसे अपना गुलाम या सेवक बता दिया ताकि किसी प्रकार की राजनीतिक या पारिवारिक उलझन न हो), तो लोगों ने उस बच्चे का नाम ही 'अब्दुल मुत्तलिब' (यानी मुत्तलिब का गुलाम या सेवक) रख दिया।
मक्का में प्रतिष्ठा और कबीले की सरदारथ
जब उनके चाचा मुत्तलिब का इंतकाल हो गया, तब मक्का और हाशिम कबीले की पूरी कमान और जिम्मेदारी अब्दुल मुत्तलिब के कंधों पर आ गई।
वह मक्का के ऐसे सम्मानित सरदार बने जिन्हें पूरी कुरैश जनजाति अपना मार्गदर्शक मानती थी।
क्या आप हजरत अब्दुल मुत्तलिब के जीवन से जुड़ी उस घटना के बारे में जानना चाहते हैं जब उन्होंने अपने सबसे प्यारे बेटे (पैगंबर मुहम्मद के वालिद) हजरत अब्दुल्लाह की जान बचाई थी?
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