अपवित्र का अर्थ क्या होता है?

जब कोई व्यक्ति या वस्तु शुद्ध नहीं होती, तो उसे अपवित्र कहा जाता है। पवित्र का विलोम अपवित्र होता है, यानी जो कुछ भी अशुद्ध, अस्वच्छ या धार्मिक दृष्टि से अयोग्य हो, उसे अपवित्र माना जाता है।

उदाहरण के तौर पर, अगर कोई व्यक्ति बिना नहाए, हाथ धोए सीधे मंदिर में प्रवेश करे, तो वह उस समय अपवित्र माना जाएगा। यह न केवल शारीरिक शुद्धता का विषय है, बल्कि मन की भावना और आचरण का भी है।

प्राचीन समय से ही हमारे संस्कारों में शुद्धता का विशेष महत्व रहा है। पूजा-पाठ, यज्ञ या किसी धार्मिक कार्य में भाग लेने से पहले स्नान करना, स्वच्छ वस्त्र धारण करना और मन को शांत रखना आवश्यक माना गया है। इसका कारण यह है कि भगवान के समक्ष खड़े होने के लिए व्यक्ति को न केवल शरीर से, बल्कि मन से भी शुद्ध होना चाहिए।

आज के समय में, अपवित्र शब्द का उपयोग केवल धार्मिक कार्यों तक सीमित नहीं है। कई बार इसे नैतिक या आचरण संबंधी कमजोरी के लिए भी कहा जाता है।

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