भारत के अन्नदाता कहे जाने वाले राज्य पंजाब में आज भी लाखों की आबादी ऐसी है जो खेतों से लेकर बड़ी-बड़ी फैक्ट्रियों में रोजाना पसीना बहाती है, लेकिन क्या आप जानते हैं कि इस खुशहाल प्रदेश में एक अकुशल मजदूर की न्यूनतम दैनिक मजदूरी मात्र लगभग 415 रुपये के आसपास तय की गई है? जी हां, महंगाई के इस आसमान छूते दौर में यह आंकड़ा चौंकाने वाला जरूर है, पर यही प्रशासनिक हकीकत है। पंजाब सरकार के श्रम विभाग द्वारा अधिसूचित यह न्यूनतम मजदूरी दरें विभिन्न श्रेणियों जैसे अकुशल, अर्ध-कुशल, कुशल और उच्च-कुशल श्रमिकों के लिए अलग-अलग निर्धारित की गई हैं, जो उनकी रोजी-रोटी का मुख्य आधार हैं।
न्यूनतम मजदूरी अधिनियम का ऐतिहासिक सफर और पंजाब की पृष्ठभूमि
आजाद भारत के इतिहास में श्रमिकों के शोषण को रोकने के लिए साल 1948 में 'न्यूनतम मजदूरी अधिनियम' (Minimum Wages Act, 1948) लागू किया गया था। इस कानून का मुख्य उद्देश्य उन क्षेत्रों में काम करने वाले मजदूरों
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