1. इस्लामी कैलेंडर (हिजरी कैलेंडर) का परिचय और महत्व
इस्लामी कैलेंडर, जिसे आमतौर पर हिजरी कैलेंडर (Hijri Calendar) कहा जाता है, दुनिया भर के मुसलमानों द्वारा उपयोग किया जाने वाला एक महत्वपूर्ण चंद्र कैलेंडर (Lunar Calendar) है।
हिजरी कैलेंडर का इतिहास लगभग 1400 साल से अधिक पुराना है।
2. बारह इस्लामी महीनों के नाम और उनका क्रम
जिस प्रकार अंग्रेजी कैलेंडर में जनवरी से दिसंबर तक बारह नाम होते हैं, ठीक उसी तरह हिजरी कैलेंडर के बारह महीनों के भी विशिष्ट अरबी नाम और उनके गहरे ऐतिहासिक व धार्मिक अर्थ हैं।
इस्लामी वर्ष के इन बारह पवित्र महीनों के क्रमबद्ध नाम निम्नलिखित हैं:
मुहर्रम (Muharram) - इस्लामी वर्ष का पहला महीना।
सफ़र (Safar) - इस्लामी वर्ष का दूसरा महीना।
रबीउल अव्वल (Rabi' al-Awwal) - इस्लामी वर्ष का तीसरा महीना।
रबीउस सानी / रबीउल आखिर (Rabi' al-Thani) - इस्लामी वर्ष का चौथा महीना।
जुमादल ऊला / जमादिउल अव्वल (Jumada al-Awwal) - इस्लामी वर्ष का पांचवां महीना।
जुमादस सानी / जमादिउल आखिर (Jumada al-Thani) - इस्लामी वर्ष का छठा महीना।
रजब (Rajab) - इस्लामी वर्ष का सातवां महीना।
शाबान (Sha'ban) - इस्लामी वर्ष का आठवां महीना।
रमज़ान (Ramadan) - इस्लामी वर्ष का नौवां महीना।
शव्वाल (Shawwal) - इस्लामी वर्ष का दसवां महीना।
जुल क़अदा (Dhu al-Qi'dah) - इस्लामी वर्ष का ग्यारहवां महीना।
जुल हिज्जा (Dhu al-Hijjah) - इस्लामी वर्ष का बारहवां और अंतिम महीना।
3. पहले छह महीनों का संक्षिप्त परिचय और विशेषताएं
मुहर्रम (Muharram)
यह इस्लामी साल का पहला महीना है, जिसे 'मुहर्रमुल हराम' भी कहा जाता है।
सफ़र (Safar)
यह इस्लामी कैलेंडर का दूसरा महीना है।
रबीउल अव्वल (Rabi' al-Awwal)
यह इस्लामी साल का तीसरा और बेहद मुबारक महीना है।
रबीउस सानी (Rabi' al-Thani)
यह चौथा महीना है।
जुमादल ऊला (Jumada al-Awwal)
यह इस्लामी वर्ष का पांचवां महीना है।
जुमादस सानी (Jumada al-Thani)
यह छठा महीना है, जिसे 'जुमादल आखिर' के नाम से भी जाना जाता है।
क्या आप इस लेख के दूसरे भाग में बाकी बचे छह महीनों (रजब से जुल हिज्जा तक) और उनके विशेष त्योहारों के बारे में विस्तार से पढ़ना चाहेंगे?
इस्लामी महीनों के नाम और उनका धार्मिक महत्व (अंतिम भाग)
हिजरी कैलेंडर के शुरुआती महीनों के बाद, आगे के महीनों का भी इस्लामिक इतिहास और संस्कृति में विशेष स्थान है।
रजब (Rajab - 7वाँ महीना): यह इस्लाम के चार पवित्र महीनों में से एक है।
इस महीने को इबादत और आगामी रमजान की तैयारी का समय माना जाता है। शाबान (Sha'ban - 8वाँ महीना): यह रमजान से ठीक पहले का महीना है।
इस महीने की 'शब-ए-बारात' की रात को विशेष रूप से जागकर इबादत की जाती है और मगफिरीत (क्षमा) की दुआ मांगी जाती है। रमजान (Ramadan - 9वाँ महीना): यह इस्लामिक वर्ष का सबसे पवित्र और बरकतों वाला महीना माना जाता है।
इसी महीने में मुस्लिम समुदाय के लोग पूरे 29 या 30 दिनों तक रोजे (उपवास) रखते हैं और पवित्र कुरान शरीफ का पाठ करते हैं। शव्वाल (Shawwal - 10वाँ महीना): इस महीने की पहली तारीख को दुनियाभर के मुसलमान 'ईद-उल-फितर' (मीठी ईद) का त्योहार मनाते हैं, जो रमजान के तुरंत बाद आता है।
ज़ुल-क़ादा (Dhu al-Qa'dah - 11वाँ महीना): यह भी चार हुर्रम (पवित्र) महीनों में शामिल है, जिसमें युद्ध या लड़ाई-झगड़े को पूरी तरह वर्जित माना गया है।
ज़ुल-हिज्जा (Dhu al-Hijjah - 12वाँ महीना): यह हिजरी वर्ष का अंतिम महीना है।
इसी महीने में दुनिया भर के मुसलमान मक्का में ऐतिहासिक 'हज' की यात्रा पूरी करते हैं। इस महीने की 10 तारीख को 'ईद-उल-अधा' (बकराईद) का मुबारक त्योहार मनाया जाता है।
निष्कर्ष
चूँकि इस्लामिक कैलेंडर चंद्रमा की गति पर आधारित होता है, इसलिए अंग्रेजी कैलेंडर (ग्रेगोरियन कैलेंडर) की तुलना में यह हर साल लगभग 10 से 11 दिन पहले आ जाता है।
क्या आप इन बारह महीनों में से किसी खास महीने या उसके इतिहास के बारे में विस्तार से जानना चाहते हैं?
टिप्पणियाँ
अभी तक कोई टिप्पणी नहीं। सबसे पहले प्रतिक्रिया दें।