महाभारत का सच्चा नायक: कर्ण
महाभारत केवल एक युद्ध की कथा नहीं, बल्कि नैतिकता, वफादारी और मानवीय संघर्ष का दर्पण है। इस महाकाव्य में कई चरित्र हैं, लेकिन एक नाम जो दिल छू जाता है—वह है कर्ण।
कर्ण को अक्सर एक दुखद नायक के रूप में याद किया जाता है। जन्म से ही त्याग दिया गया, उसकी माँ कुंती ने उसे नदी में बहा दिया, शर्म या डर के कारण। एक सूत के घर में पला-बढ़ा, लेकिन उसकी वीरता, दानशीलता और सच्चाई ने उसे देवताओं जैसा बना दिया।
वह अर्जुन का प्रतिद्वंद्वी था, लेकिन उसकी तपस्या, धनुर्विद्या और सिद्धियाँ किसी से कम नहीं थीं। फिर भी, उसका जन्म उसके खिलाफ काम करता रहा। न उसे समाज ने स्वीकार किया, न राजपाट ने, और न ही उसके सच्चे परिवार ने।
फिर भी, कर्ण ने कभी दुर्योधन का साथ नहीं छोड़ा—न क्षत्रिय धर्म के कारण, न वफादारी के कारण, बल्कि इंसानी संबंधों के प्रति उसकी गहरी निष्ठा के कारण। युद्ध में जब वह मरता है, तो वह अपनी गाथा क
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