जन्म देने और स्तनपान कराने के बाद सही आहार का महत्व
बच्चे के जन्म के बाद का समय किसी भी महिला के जीवन में एक बेहद खूबसूरत और नया पड़ाव होता है। मातृत्व का यह अहसास जितना आनंददायक होता है, उतना ही यह शरीर के लिए थका देने वाला भी हो सकता है। प्रसव (Delivery) के बाद महिला के शरीर को रिकवरी और हीलिंग के लिए भारी मात्रा में ऊर्जा की आवश्यकता होती है।
प्रसव के बाद शरीर की बदलती ज़रूरतें
गर्भधारण और प्रसव की प्रक्रिया के दौरान महिला का शरीर कई तरह के शारीरिक और हार्मोनल बदलावों से गुजरता है।
शुरुआती दिनों में कैसा होना चाहिए भोजन?
डिलीवरी के ठीक बाद के शुरुआती हफ़्तों में पाचन तंत्र (Digestive System) काफी संवेदनशील और कमजोर होता है।
हल्का और सुपाच्य आहार: शुरुआती हफ़्तों में भारी, तले-भुने या बहुत अधिक मसालेदार भोजन से बचना चाहिए।
इसके बजाय मूंग दाल की खिचड़ी, दलिया, ओट्स और उबली हुई हल्की सब्जियां बेहतर विकल्प मानी जाती हैं। पारंपरिक भारतीय सुपरफूड्स: भारतीय परंपराओं में नई मां के लिए गोंद के लड्डू, पंजीरी, अजवाइन का पानी और हल्दी वाले दूध का सेवन बहुत फायदेमंद माना गया है।
ये खाद्य पदार्थ शरीर को अंदर से ताकत देते हैं और टांकों व आंतरिक कमजोरी को तेजी से ठीक करते हैं। पर्याप्त मात्रा में तरल पदार्थ: स्तनपान कराने वाली माताओं को सामान्य से अधिक प्याس लगती है क्योंकि शरीर का अधिकांश पानी दूध के निर्माण में उपयोग होता है।
इसलिए दिनभर में पर्याप्त गुनगुना पानी, नारियल पानी, छाछ और सौंफ-जीरे का पानी जरूर पीना चाहिए।
स्तनपान के दौरान दूध बढ़ाने वाले प्रमुख पोषक तत्व
शिशु के संपूर्ण पोषण के लिए यह जरूरी है कि मां के शरीर में पर्याप्त मात्रा में दूध का उत्पादन हो।
मेथी और अजवाइन: मेथी के दानों को रातभर पानी में भिगोकर सुबह उसका पानी पीने या सेवन करने से दूध का उत्पादन बढ़ता है।
हालांकि अजवाइन का इस्तेमाल सीमित मात्रा में ही करना चाहिए। ड्राई फ्रूट्स (सूखे मेवे): बादाम, अखरोट, काजू और खजूर में हेल्दी फैट, प्रोटीन और मिनरल्स प्रचुर मात्रा में होते हैं।
इन्हें दूध के साथ लेने से तुरंत ऊर्जा मिलती है। हरी पत्तेदार सब्जियां: पालक, मेथी और बथुआ जैसी सब्जियां आयरन, कैल्शियम और विटामिन से भरपूर होती हैं, जो खून की कमी को दूर करती हैं।
क्या आप इस लेख के अगले भाग में "विशिष्ट खाद्य पदार्थों के साप्ताहिक चार्ट और किन चीज़ों से पूरी तरह परहेज करना चाहिए" के बारे में जानना चाहते हैं?
स्तनपान और रिकवरी के लिए अन्य जरूरी आहार
बच्चे के जन्म और स्तनपान के शुरुआती हफ्तों में माँ के शरीर को तेजी से रिकवर होने के लिए अतिरिक्त ऊर्जा और पोषक तत्वों की आवश्यकता होती है।
दूध और डेयरी उत्पाद: रोज़ाना कम से कम एक से दो गिलास दूध, दही या पनीर का सेवन करें।
ये कैल्शियम और प्रोटीन के बेहतरीन स्रोत हैं, जो आपकी हड्डियों को मजबूत रखते हैं और स्तनपान के दौरान शरीर की कैल्शियम की कमी को पूरा करते हैं। ड्राई फ्रूट्स और बीज: बादाम, अखरोट, खजूर, और अंजीर के साथ-साथ अलसी या तिल के बीजों का सेवन करें।
ये हेल्दी फैट, विटामिन और मिनरल्स प्रदान करते हैं, जो बच्चे के दिमागी विकास और आपकी ताकत के लिए जरूरी हैं। पारंपरिक सुपरफूड्स: भारतीय संस्कृति में डिलीवरी के बाद गोंद के लड्डू, मेथी के बीज, और अजवाइन-जीरे का पानी बेहद फायदेमंद माने जाते हैं।
मेथी और शतावरी प्राकृतिक रूप से स्तनपान में दूध की मात्रा बढ़ाने (गैलेक्टागॉग) में मदद करते हैं। हाइड्रेशन (पर्याप्त तरल पदार्थ): स्तनपान के दौरान शरीर में पानी की कमी जल्दी हो सकती है।
इसलिए दिनभर में पर्याप्त मात्रा में गुनगुना पानी, नारियल पानी, छाछ या सादा सूप पीते रहें।
किन चीजों से बनाएं दूरी?
स्वास्थ्य लाभ और शिशु के पेट की सुरक्षा के लिए कुछ चीजों से परहेज करना बहुत जरूरी है:
अतिरिक्त कैफ़ीन और शराब: अत्यधिक चाय, कॉफी या कैफ़ीनयुक्त पेय पदार्थों से बचें क्योंकि इनसे शरीर में पानी की कमी हो सकती है।
शराब का सेवन शिशु के विकास के लिए बेहद हानिकारक है और इससे पूरी तरह बचना चाहिए। तला-भुना और अत्यधिक मसालेदार भोजन: प्रसव के बाद पाचन तंत्र संवेदनशील होता है।
बहुत अधिक मिर्च-मसाले और डीप-फ्राइड चीजें खाने से एसिडिटी, गैस या पेट में ऐंठन की समस्या हो सकती है। गैस बनाने वाली सब्जियां: कुछ महिलाओं को गोभी, ब्रोकोली या राजमा जैसी चीजों से गैस की समस्या होती है, जो स्तनपान के जरिए शिशु को भी असहज कर सकती है।
इन्हें सीमित मात्रा में ही खाएं।
विशेष टिप: अपने शरीर की सुनें और किसी भी नए आहार को अपनी डाइट में शामिल करने से पहले अपने डॉक्टर या किसी आहार विशेषज्ञ (डिटिशियन) से व्यक्तिगत परामर्श जरूर लें।
क्या आप स्तनपान के दौरान दूध की मात्रा बढ़ाने वाले कुछ असरदार घरेलू नुस्खों के बारे में जानना चाहती हैं?
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