इस्लामिक और पारंपरिक दृष्टिकोण: ईश्वरीय ग्रंथ

इस्लाम धर्म के अनुयायियों और पारंपरिक इस्लामी मान्यताओं के अनुसार, कुरान का कोई मानवीय लेखक नहीं है। मुसलमानों का अटूट विश्वास है कि कुरान सीधे तौर पर ईश्वर यानी अल्लाह का संदेश है।

इस मान्यता के अनुसार, यह ग्रंथ फरिश्ते (देवदूत) जिब्राईल (Gabriel) के माध्यम से इस्लाम के अंतिम पैगंबर हजरत मुहम्मद पर लगभग 23 वर्षों के दौरान अलग-अलग समय पर और परिस्थितियों के अनुसार अवतरित (Reveal) किया गया था।

  • अक्षरशः वाणी: इस्लामिक धर्मशास्त्र में यह माना जाता है कि कुरान का एक-एक शब्द और आयत सीधे ईश्वर की तरफ से है, न कि पैगंबर मुहम्मद के अपने विचार या उनकी खुद की रचना। पैगंबर मुहम्मद को केवल एक माध्यम (Messenger) के रूप में देखा जाता है, जिन्होंने ईश्वर के इस संदेश को पूरी मानवता तक पहुंचाया।

  • उम्मिय (अक्षरज्ञान रहित) होना: इस्लामिक विद्वान इस बात पर जोर देते हैं कि पैगंबर मुहम्मद अनपढ़ (उम्मिय) थे, यानी उन्होंने किसी सामान्य स्कूल या शिक्षक से लिखना-पढ़ना नहीं सीखा था। ऐसे में, अरबी भाषा के इतने उच्चकोटि के साहित्य, व्याकरण, और गहन दार्शनिक ज्ञान वाले ग्रंथ की रचना खुद कर पाना एक इंसान के लिए असंभव माना गया है।

ऐतिहासिक और अकादमिक दृष्टिकोण: संकलन का इतिहास

यदि हम इतिहास और आधुनिक अकादमिक शोध (Academic Research) की दृष्टि से देखें, तो शोधकर्ता इस बात का अध्ययन करते हैं कि कुरान की आयतें मौखिक रूप से पैगंबर मुहम्मद के समय कैसे फैलीं और बाद में उन्हें एक लिखित पुस्तक के रूप में कैसे संकलित किया गया।

  1. मौखिक परंपरा (Oral Tradition): 7वीं शताब्दी की शुरुआत में जब अरब प्रायद्वीप में इस्लाम का उदय हुआ, तब अधिकांश अरब समाज की संस्कृति मुख्य रूप से मौखिक (Oral) थी। कविता और इतिहास को याद रखना उनकी खूबी थी। जब पैगंबर मुहम्मद पर आयतें उतरती थीं, तो वे उन्हें अपने अनुयायियों को सुनाते थे। अनुयायी या साथी (सहाबा) उन्हें याद कर लेते थे और खजूर के पत्तों, चमड़े, हड्डियों और पत्थरों पर लिख लेते थे।

  2. लिखित रूप में संकलन: पैगंबर मुहम्मद के जीवनकाल में ही कुरान के हिस्सों को लिखा जाने लगा था, लेकिन यह बिखरी हुई अवस्था में था। पैगंबर के वियोग के बाद, पहले खलीफा हजरत अबू बकर के कार्यकाल में और बाद में तीसरे खलीफा हजरत उस्मान के दौर में, इन सभी बिखरे हुए अंशों को एक आधिकारिक और प्रामाणिक पुस्तक के रूप में व्यवस्थित किया गया। उस्मान के द्वारा तैयार किया गया यह नुस्खा (Standardized Text) आज पूरी दुनिया में मानक माना जाता है।

इस प्रकार, जहाँ एक ओर धार्मिक आस्था इसे पूरी तरह से ईश्वरीय अवतरण मानती है, वहीं इतिहासकार इसे पैगंबर मुहम्मद के वचनों के संकलन के रूप में देखते हैं, जिन्हें उनके साथियों ने संरक्षित किया।