दुनिया के सबसे बेशकीमती, विवादित और रहस्यमयी हीरों में शुमार कोहिनूर (Koh-i-Noor) का इतिहास अपने आप में युद्ध, कूट谋, सत्ता परिवर्तन और शाही वैभव की एक लंबी दास्तान है। जब भी इस अद्भुत रत्न की चर्चा होती है, तो सबसे मुख्य सवाल यह उठता है कि आखिर वह कौन था जो इस चमकते हुए 'प्रकाश के पहाड़' को भारत से बाहर ले गया था? इस लेख के पहले भाग में हम इसी ऐतिहासिक मोड़ और उस घटनाक्रम का विस्तार से विश्लेषण करेंगे जिसने भारत के इस अमूल्य खजाने को हमेशा के लिए बदल दिया।

1. मुगल साम्राज्य और मयूर सिंहासन (Peacock Throne) की शान

कोहिनूर हीरा मूल रूप से भारत की ही धरती—विशेष तौर पर दक्षिण भारत की प्रसिद्ध गोलकुंडा की खदानों से निकला था। सदियों तक यह हीरा भारत के विभिन्न राजवंशों के पास रहा, लेकिन मुगलों के शासनकाल में इसे जो प्रतिष्ठा और प्रसिद्धि मिली, वह अभूतपूर्व थी।

  • शाहजहाँ का मयूर सिंहासन: मुगल बादशाह शाहजहाँ द्वारा बनवाए गए प्रसिद्ध मयूर सिंहासन (तख्त-ए-ताऊस) में इस हीरे को जड़वाया गया था।

  • अमूल्य धरोहर: यह सिंहासन सोने, अनगिनत मोतियों, पन्नों, याकूत और हीरों से सुसज्जित था, और इसके ठीक ऊपर केंद्र में कोहिनूर अपनी अद्भुत चमक बिखेरता था।

  • मुगल शक्ति का प्रतीक: पीढ़ियों तक यह हीरा मुगल सल्तनत की ताकत, अकूत संपत्ति और संप्रभुता का सबसे बड़ा प्रतीक बना रहा। मुगलों के आठ पीढ़ियों के खजाने के साथ यह दिल्ली के लाल किले के भीतर सुरक्षित था।

2. वह खौफनाक साल: 1739 और नादिर शाह का आक्रमण

अठारहवीं शताब्दी के शुरुआती दशकों में मुगल साम्राज्य कमजोर पड़ने लगा था। इसी कमज़ोरी का फायदा उठाया फारस (वर्तमान ईरान) के क्रूर और महत्वाकांक्षी शासक नादिर शाह ने।

  • दिल्ली पर हमला: साल 1739 में नादिर शाह ने अपनी विशाल सेना के साथ उत्तर भारत पर आक्रमण किया। करनाल के युद्ध में मुगल बादशाह मुहम्मद शाह को करारी शिकस्त मिली।

  • ऐतिहासिक लूट: इसके बाद नादिर शाह ने दिल्ली में प्रवेश किया और वहां ऐसा कत्लेआम व लूटपाट मचाई जिसने पूरे देश को दहला दिया। मुगलों का सदियों पुराना खजाना, जिसमें मयूर सिंहासन भी शामिल था, फारसी सैनिकों के हाथ लग गया।

3. पगड़ी बदलने की वह प्रसिद्ध चाल और नामकरण

ऐतिहासिक वृत्तांतों के अनुसार, जब नादिर शाह ने दिल्ली को लूटा, तब उसे इस बात की सूचना मिली कि पराजित मुगल बादशाह मुहम्मद शाह ने अपना सबसे कीमती हीरा अपनी पगड़ी में छिपा रखा है।

रोचक तथ्य: कहा जाता है कि नादिर शाह ने कूटनीति का परिचय देते हुए शांति और मित्रता के प्रतीक के रूप में मुगल बादशाह के साथ अपनी 'पगड़ी बदलने' (Turban Exchange) की रस्म निभाई। इस प्रकार मुहम्मद शाह चाहकर भी मना नहीं कर पाए और हीरा नादिर शाह के पास चला गया।

जब नादिर शाह ने उस हीरे को पहली बार अपनी खुली धूप या रोशनी में देखा, तो उसके मुँह से बेसाख्ता निकला—"कोह-ए-नूर", जिसका फारसी में अर्थ होता है "प्रकाश का पहाड़" (Mountain of Light) यही वह ऐतिहासिक क्षण था जब यह हीरा पहली बार भारत की भौगोलिक सीमा से बाहर निकलकर फारس (ईरान) की ओर रवाना हुआ।

इस प्रकार, नादिर शाह वह पहला विदेशी आक्रांता था जो भारत के मयूर सिंहासन के इस अनमोल नगीने को जबरन और कूटनीतिक चालों के माध्यम से देश के बाहर ले गया। इसके बाद यह हीरा किस तरह अफगानिस्तान के शासकों के हाथ लगा और अंततः ब्रिटिश ईस्ट इंडिया कंपनी के नियंत्रण में पहुंचा, इसकी विस्तृत चर्चा हम इस लेख के अगले भाग में करेंगे।

कोहिनूर की वापसी और ब्रिटेन तक का सफर

महाराजा रणजीत सिंह और भारत वापसी

फारसी शासक नादिर शाह द्वारा मुगलों के खजाने से कोहिनूर को ईरान ले जाने के बाद, यह हीरा अफगानिस्तान के शासकों के हाथों में चला गया। साल 1813 में अफगानिस्तान के अपदस्थ शासक शाह शुजा ने अपनी जान बचाकर और राजनीतिक सहायता पाने के लिए पंजाब के प्रतापी शासक महाराजा रणजीत सिंह को यह अनमोल हीरा भेंट किया। इस प्रकार, लगभग एक सदी बाद कोहिनूर हीरा वापस अपनी मातृभूमि भारत (पंजाब) की धरती पर लौट आया। महाराजा रणजीत सिंह ने इसे अपने ताज और तोशखाने की शान बनाया। उनकी मृत्यु के बाद सिख साम्राज्य कमजोर हो गया और यह हीरा उनके उत्तराधिकारियों के पास रहा।

अंग्रेजों के अधिकार में और महारानी विक्टोरिया का ताज

सन 1849 में द्वितीय आंग्ल-सिख युद्ध के बाद ब्रिटिश ईस्ट इंडिया कंपनी ने पंजाब पर अधिकार कर लिया। 'लाहौर की संधि' के तहत नाबालिग महाराजा दलीप सिंह को यह ऐतिहासिक हीरा ब्रिटिश क्राउन को सौंपने के लिए बाध्य किया गया। इसके बाद, साल 1850 में इस बेशकीमती हीरे को आधिकारिक तौर पर भारत से लंदन भेज दिया गया, जहाँ इसे तत्कालीन ब्रिटिश महारानी विक्टोरिया को भेंट किया गया।

ध्यान दें: हीरा पारसियों से लेकर मुगलों, अफगानों और अंततः सिखों के हाथों से होता हुआ ब्रिटिश राजशाही तक पहुंचा।

आज यह हीरा लंदन के टॉवर में ब्रिटिश शाही परिवार के म्यूजियम में सुरक्षित रखा हुआ है और महारानी एलिजाबेथ (क्वीन मदर) के ताज की शोभा बढ़ाता है। हालांकि आज भी भारत में इसे वापस लाने की मांग समय-समय पर उठती रहती है, लेकिन ऐतिहासिक उथल-पुथल का यह सफर इसे दुनिया का सबसे विवादित और चर्चित हीरा बनाता है।

क्या आप कोहिनूर से जुड़ी किसी अन्य ऐतिहासिक घटना या इसके कथित 'अभिशाप' के बारे में विस्तार से जानना चाहते हैं?