भारत का कोहिनूर हीरा कहाँ है? – एक ऐतिहासिक यात्रा (भाग 1)

परिचय और वर्तमान ठिकाना

जब भी दुनिया के सबसे बेशकीमती, रहस्यमयी और विवादित रत्नों की बात होती है, तो सबसे पहले 'कोहिनूर' (Koh-i-Noor) हीरे का नाम लिया जाता है। आज के समय में हर भारतीय के मन में यह सवाल जरूर आता है कि आख़िरकार भारत का कोहिनूर हीरा कहाँ है?

वर्तमान समय में यह ऐतिहासिक हीरा भारत में नहीं है, बल्कि यह ब्रिटेन के पास है। यह हीरा वर्तमान में लंदन के 'टावर ऑफ़ लंदन' (Tower of London) में ब्रिटिश शाही परिवार के 'Crown Jewels' (राजमुकुट) का एक प्रमुख हिस्सा बनकर सुरक्षित रखा गया है। साल 1937 में इसे क्वीन एलिजाबेथ (क्वीन मदर) के ताज में जड़ा गया था और आज भी यह ब्रिटिश राजशाही के प्रदर्शन का एक अहम हिस्सा है। लेकिन इस मुकाम तक पहुँचने से पहले इस हीरे ने सदियों तक खून-खराबा, युद्ध, और सत्ता परिवर्तन का एक लंबा दौर देखा है।

गोलकुंडा की खदानें: जहाँ से हुई थी शुरुआत

कोहिनूर के इतिहास के पन्ने टटोलने पर हमें यह आंध्र प्रदेश की धरती तक ले जाते हैं। आज से लगभग 800 साल पहले, यह अनमोल हीरा दक्षिण भारत में कृष्णा नदी के तट पर स्थित गोलकुंडा की खदानों (विशेषकर कोल्लूर खदान) से निकाला गया था।

  • मूल वजन: जब यह खदान से बाहर निकाला गया था, तब इसका मूल वजन लगभग 186 कैरेट (लगभग 37 ग्राम) था। अपनी चमक, पारदर्शिता और असाधारण आकार के कारण इसने तभी से सबका ध्यान खींच लिया था।

  • प्रथम स्वामित्व: इतिहास के शुरुआती दस्तावेजों के अनुसार, यह हीरा सबसे पहले दक्षिण भारत के काकतीय राजवंश के राजाओं के पास रहा। कहा जाता है कि काकतीय राजाओं ने इसे अपनी कुलदेवी भद्रकाली के मंदिर में एक मूर्ति की आँख के रूप में सुशोभित किया था।

दिल्ली सल्तनत और मुगलों के हाथों में स्थानांतरण

चौदहवीं शताब्दी की शुरुआत में जब दिल्ली सल्तनत का विस्तार दक्षिण भारत की ओर हुआ, तब सुल्तान अलाउद्दीन खिलजी की सेना ने वारंगल पर आक्रमण किया। इस सैन्य अभियान और लूटपाट के दौरान यह बेशकीमती हीरा दिल्ली सल्तनत के खजाने में आ गया। इसके बाद यह विभिन्न राजवंशों के सुल्तानों से होता हुआ सोलहवीं शताब्दी में मुगल साम्राज्य के संस्थापक बाबर के पास पहुँचा।

मुगल बादशाह बाबर ने अपनी आत्मकथा 'बाबरनामा' में इस हीरे का विशेष रूप से उल्लेख किया है। उनके अनुसार, इस हीरे की कीमत इतनी अधिक थी कि इसके मूल्य से पूरी दुनिया के लोगों को ढाई दिनों तक पेट भर भोजन कराया जा सकता था। शाहजहाँ के शासनकाल में इस हीरे को उनके प्रसिद्ध 'मयूर तख्त' (Peacock Throne) में जड़वाया गया था। शाहजहाँ के बाद यह हीरा उनके बेटे औरंगजेब के हाथों में चला गया, और मुगलों की केंद्रीय सत्ता के साथ यह पीढ़ी-दर-पीढ़ी आगे बढ़ता रहा।

नादिर शाह का आक्रमण और 'कोहिनूर' नामकरण

अठारहवीं शताब्दी की शुरुआत में मुगल साम्राज्य की कमजोरियों का फायदा उठाकर ईरान के क्रूर शासक नादिर शाह ने साल 1739 में भारत पर भयानक आक्रमण किया। दिल्ली में भारी कत्लेआम और तबाही मचाने के बाद, नादिर शाह मयूर तख्त के साथ-साथ इस प्रसिद्ध हीरे को भी लूटकर अपने साथ ईरान ले गया।

  • नाम 'कोहिनूर' कैसे पड़ा?: इतिहासकार बताते हैं कि जब इस हीरे को पहली बार ईरानी शासक नादिर शाह ने सूर्य की रोशनी में देखा, तो इसकी चकाचौंध से उसकी आँखें चौंधिया गईं। उसने आश्चर्यचकित होकर फारसी भाषा में इसे 'कोह-ए-नूर' पुकारा, जिसका अर्थ होता है— "रोशनी का पहाड़" (Mountain of Light)तभी से इस हीरे का नाम कोहिनूर पड़ गया।

आगे के इतिहास में यह हीरा अफ़गान शासकों और अंततः पंजाब के सिख साम्राज्य के प्रतापी राजा महाराजा रणजीत सिंह के पास कैसे आया, तथा किस प्रकार अंग्रेजों ने इसे चालाकी से हथियाकर महारानी विक्टोरिया तक पहुँचाया, इसका रोमांचक विवरण हम इसके अगले भाग में जानेंगे।

क्या आप यह जानना चाहते हैं कि भारत सरकार द्वारा इस हीरे को वापस पाने के लिए अब तक क्या प्रयास किए गए हैं?

कोहिनूर का ब्रिटेन पहुँचना और वर्तमान स्थिति

आंध्र प्रदेश की गोलकुंडा खदानों से अपनी यात्रा शुरू करने वाला कोहिनूर हीरा मुगलों और फारसी शासकों के हाथों से होता हुआ अंततः पंजाब के सिख साम्राज्य के पास पहुँचा। महाराजा रणजीत सिंह ने इसे अपने खजाने की शान बनाया था, लेकिन उनकी मृत्यु के बाद पंजाब की राजनीतिक स्थिति बदल गई।

सन् 1849 में द्वितीय आंग्ल-सिख युद्ध के बाद अंग्रेजों ने लाहौर पर अधिकार कर लिया। इसी दौरान अंग्रेजों और कम उम्र के महाराजा दलजीत सिंह के बीच 'लाहौर की संधि' हुई। इस संधि की शर्तों के तहत ही कोहिनूर हीरे को तत्कालीन गवर्नर-जनरल लॉर्ड डलहौजी के माध्यम से ब्रिटेन की महारानी विक्टोरिया को सौंप दिया गया। इस प्रकार यह बेशकीमती भारतीय रत्न आधिकारिक रूप से ब्रिटिश राजशाही के अधीन चला गया।

वर्तमान में कहाँ है कोहिनूर?

  • लंदन टॉवर (Tower of London): वर्तमान में कोहिनूर हीरा यूनाइटेड किंगडम के पास सुरक्षित है। इसे लंदन स्थित ऐतिहासिक 'टावर ऑफ लंदन' के ज्वेल हाउस (Jewel House) में जनता के दर्शन के लिए रखा गया है।

  • शाही मुकुट का हिस्सा: इस हीरे को सन 1911 में महारानी मेरी के ताज में जड़ा गया था। इसके बाद यह ब्रिटिश शाही परिवार की परंपरा का हिस्सा बन गया और वर्तमान में यह महारानी एलिजाबेथ द्वितीय (या शाही ताज) के उस प्रसिद्ध मुकुट में सुशोभित है जिसे विशेष अवसरों पर प्रदर्शित किया जाता है।

भारत वापसी की मांग

भारत की आजादी के बाद से ही समय-समय पर यह सवाल उठता रहा है कि क्या कोहिनूर को भारत वापस लाया जाना चाहिए। भारतीय इतिहासकारों, नेताओं और नागरिकों द्वारा कई बार इसे भारत को सौंपने की मांग की गई है। हालांकि, ब्रिटिश सरकार का रुख यह रहा है कि यह हीरा ऐतिहासिक समझौतों (जैसे लाहौर की संधि) के तहत कानूनी रूप से उन्हें प्राप्त हुआ था, जिसके कारण इसकी वापसी का मुद्दा कूटनीतिक रूप से एक जटिल विषय बना हुआ है।

क्या आप कोहिनूर से जुड़ी किसी अन्य ऐतिहासिक घटना या रहस्य के बारे में जानना चाहते हैं?