भारत में फुटबॉल का इतिहास: पहली फुटबॉल टीम और उसकी अनकही दास्तान (भाग-1)
जब भी भारत में लोकप्रिय खेलों की बात होती है, तो क्रिकेट का नाम सबसे पहले जेहन में आता है। लेकिन बहुत कम लोग यह जानते हैं कि भारत का खेल इतिहास जितना पुराना है, उतना ही रोमांचक यहाँ फुटबॉल का सफर भी रहा है। ब्रिटिश औपनिवेशिक काल के दौरान भारत की जमीन पर कदम रखने वाला यह खेल यहाँ की संस्कृति और जुनून का एक अहम हिस्सा बन चुका है।
ब्रिटिश काल और कलकत्ता: भारतीय फुटबॉल का उद्गम स्थल
भारत में आधुनिक फुटबॉल की शुरुआत का श्रेय ब्रिटिश सैनिकों और अधिकारियों को जाता है। 19वीं शताब्दी के मध्य में जब अंग्रेज भारत आए, तो वे अपने साथ इस खेल को भी लेते आए थे।
इस खेल को भारत में फैलाने का मुख्य केंद्र उस समय की ब्रिटिश भारत की राजधानी कलकत्ता (अब कोलकाता) को, जो आगे चलकर भारतीय फुटबॉल का मक्का बना।
भारत की सबसे पहली फुटबॉल टीम: कलकत्ता एफसी (Calcutta FC)
यदि आधिकारिक दस्तावेजों और ऐतिहासिक अभिलेखों की मानें, तो भारत का सबसे पहला स्थापित फुटबॉल क्लब कलकत्ता एफसी (Calcutta FC) था, जिसकी स्थापना वर्ष 1872 में की गई थी।
तथ्य और विवाद:
हालांकि यह इतिहास का एक चर्चित तथ्य है कि कलकत्ता एफसी की स्थापना 1872 में हुई थी, लेकिन शुरुआती कुछ वर्षों तक यह क्लब मुख्य रूप से रग्बी खेल के रूप में सक्रिय था और बाद में (लगभग 1894 में) इसने पूरी तरह से फुटबॉल को अपना लिया। इसके बावजूद, इसे भारतीय उपमहाद्वीप में संगठित फुटबॉल क्लब के रूप में दर्ज शुरुआती संगठनों में गिना जाता है।
भारतीय फुटबॉल के पितामह: नागेंद्र प्रसाद सर्वाधिकारी
यद्यपि अंग्रेजों ने फुटबॉल को भारत की जमीन पर उतारा था, लेकिन इसे आम भारतीयों विशेषकर युवाओं के बीच लोकप्रिय बनाने का श्रेय नागेंद्र प्रसाद सर्वाधिकारी को जाता है, जिन्हें 'भारतीय फुटबॉल का पितामह' (Father of Indian Football) कहा जाता है।
उन्होंने न केवल खुद फुटबॉल खेलना शुरू किया, बल्कि कलकत्ता के हेयर स्कूल और आसपास के मैदानों में छात्रों की कई टीमें तैयार कीं।
क्या आप जानना चाहते हैं कि कलकत्ता एफसी के बाद किन स्वदेशी भारतीय क्लबों ने अंग्रेजों को उनके ही खेल में धूल चटाई?
भारतीय फुटबॉल का स्वर्णिम विस्तार और क्लब संस्कृति
कलकत्ता एफसी (Calcutta FC) की स्थापना के बाद देश में फुटबॉल का कारवां तेजी से आगे बढ़ा। बंगाल को भारतीय फुटबॉल की मक्का कहा जाता है, क्योंकि यहीं से इस खेल ने जन-आंदोलन का रूप लिया।
इसी क्रम में 1889 में 'मोहन बागान एथलेटिक क्लब' की स्थापना हुई, जो आज एशिया के सबसे पुराने और प्रतिष्ठित फुटबॉल क्लबों में गिना जाता है।
अन्य क्षेत्रीय क्लब और राष्ट्रीय पहचान
बंगाल के अलावा देश के अन्य कोनों में भी फुटबॉल ने गहरी जड़ें जमाईं।
समय के साथ, 1937 में 'ऑल इंडिया फुटबॉल फेडरेशन' (AIFF) का गठन हुआ, जिसने देश में इस खेल को संगठित और आधिकारिक रूप दिया।
संक्षेप में कहा जाए तो, कलकत्ता एफसी से शुरू हुआ यह सफर आज देश के कोने-कोने तक पहुंच चुका है और भारत में फुटबॉल का यह इतिहास प्रेरणा से भरपूर है।
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