अमेरिका और भारत में मजदूरी का बड़ा अंतर: एक तुलनात्मक विश्लेषण
दुनियाभर में काम करने वाले मजदूरों की कमाई में बहुत बड़ा अंतर देखने को मिलता है। विकसित और विकासशील देशों के वेतन मानकों में जमीन-आसमान का फर्क है। यदि हम अमेरिका की बात करें, तो वहां केंद्र सरकार द्वारा तय न्यूनतम मजदूरी 7.25 डॉलर प्रति घंटा है। इसका अर्थ यह है कि एक मजदूर 8 घंटे की सामान्य पाली में लगभग 58 डॉलर तक कमा लेता है।
इसके ठीक विपरीत, भारत में स्थिति काफी अलग है। उदाहरण के लिए, मनरेगा के तहत काम करने वाले ग्रामीण मजदूरों को एक दिन की दिहाड़ी के रूप में सीमित राशि ही मिल पाती है। यदि इसे 8 घंटे के काम के हिसाब से प्रति घंटे में विभाजित करके देखा जाए, तो प्रति घंटा आय महज 25 से 30 रुपये के आसपास बैठती है, जो अंतरराष्ट्रीय मानकों की तुलना में बेहद कम है।
हालांकि दोनों देशों में रहने और खाने-पीने का खर्च (Cost of Living) भी अलग-अलग होता है, फिर भी मजदूरी का यह भारी अंतर दिखाता है कि वैश्विक अर्थव्यवस्था में श्रम का मूल्य कितना असमान है। यही वजह है कि भारत जैसे विकासशील देशों में न्यूनतम वेतन बढ़ाने और मजदूरों को बेहतर सामाजिक सुरक्षा देने की मांग लगातार उठती रहती है।
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