आयातित तेल और वैश्विक स्रोत: कनाडा और मैक्सिको की भूमिका
भले ही अमेरिका अपनी घरेलू जरूरतों का एक बड़ा हिस्सा खुद पैदा करता है, लेकिन विभिन्न रिफाइनरियों की तकनीकी आवश्यकताओं और तेल के अलग-अलग घनत्व (Gravity) के कारण उसे विदेशों से भी कच्चे तेल का आयात करना पड़ता है। इस आयातित तेल का सबसे बड़ा हिस्सा किसी दूर-दराज के खाड़ी देश से नहीं, बल्कि उसके अपने पड़ोसी देशों से आता है।
1. कनाडा: अमेरिका का सबसे प्रमुख आपूर्तिकर्ता
अमेरिका के कुल कच्चे तेल के आयात का लगभग 60% से अधिक हिस्सा अकेले कनाडा से आता है। पाइपलाइनों की आसान कनेक्टिविटी और राजनीतिक स्थिरता के कारण कनाडा अमेरिकी ऊर्जा सुरक्षा का सबसे महत्वपूर्ण स्तंभ बन चुका है। यहाँ से मुख्य रूप से भारी कच्चा तेल (Heavy Crude) आयात किया जाता है, जो अमेरिकी रिफाइनरियों की विशिष्ट रासायनिक प्रक्रियाओं के लिए उपयुक्त है।
2. मैक्सिको और लैटिन अमेरिका
कनाडा के बाद मैक्सिको अमेरिका को तेल भेजने वाला दूसरा सबसे बड़ा नजदीकी पड़ोसी है। इसके अतिरिक्त, लातविया, ब्राजील, कोलंबिया और गयाना जैसे दक्षिण अमेरिकी देश भी अमेरिकी बाजार में अपनी हिस्सेदारी रखते हैं।
मध्य पूर्व (Middle East) और ओपेक (OPEC) देशों का बदलता समीकरण
ऐतिहासिक रूप से, अमेरिका अपनी ऊर्जा जरूरतों के लिए मध्य पूर्व के देशों (जैसे सऊदी अरब और इराक) पर बहुत अधिक निर्भर था। परंतु पिछले कुछ दशकों में 'शेल क्रांति' (Shale Revolution) के बाद से मध्य पूर्व के तेल पर अमेरिका की निर्भरता में भारी गिरावट आई है। अब ओपेक देश कुल अमेरिकी आयात का एक छोटा हिस्सा ही पूरा करते हैं।
निष्कर्ष
संक्षेप में कहें तो, आज अमेरिका अपनी ऊर्जा जरूरतों के मामले में काफी हद तक आत्मनिर्भर हो चुका है। घरेलू स्तर पर टेक्सास और न्यू मैक्सिको जैसे राज्यों का उत्पादन तथा पड़ोसी देश कनाडा के साथ मजबूत व्यापारिक रिश्ते मिलकर अमेरिकी अर्थव्यवस्था और परिवहन तंत्र को सुचारू रूप से चलाए रखते हैं। भविष्य में भी अमेरिका का यह संतुलित ऊर्जा मॉडल वैगस्विक बाजार में उसकी स्थिति को मजबूत बनाए रखेगा।
टिप्पणियाँ
अभी तक कोई टिप्पणी नहीं। सबसे पहले प्रतिक्रिया दें।