सीधे और स्पष्ट शब्दों में कहें तो, भारत में एशियाई शेरों की वर्तमान अनुमानित संख्या 674 के आसपास है। यह आंकड़ा गुजरात वन विभाग के 2020 के 'पूनम अवलोकन' पर आधारित है। हालांकि यह संख्या सुनने में छोटी लग सकती है, लेकिन अगर हम बीती सदी के इतिहास पर नजर डालें, तो यह वन्यजीव संरक्षण की दुनिया का सबसे चमत्कारिक पुनरुत्थान है। आज भारत पूरी दुनिया में एशियाई शेरों का इकलौता और अंतिम घर है, जो हमारी जैव-विविधता की रीढ़ की हड्डी के समान है।

विरासत का संकट और अस्तित्व की अटूट जंग

एक समय था जब इन आलीशान शिकारियों की दहाड़ पूरे पश्चिम एशिया से लेकर पूर्वी भारत के जंगलों तक गूँजती थी। लेकिन अनियंत्रित शिकार और जंगलों के विनाश ने इन्हें विलुप्ति की कगार पर ला

भारत में शेरों के संरक्षण में चुनौतियाँ और विशेषज्ञ सुझाव

भारत में शेरों की संख्या में वृद्धि एक सकारात्मक संकेत है, लेकिन विशेषज्ञों का मानना है कि इस सफलता के साथ कई चुनौतियाँ भी जुड़ी हैं। सबसे बड़ी समस्या 'जीन पूल' की विविधता में कमी है। चूंकि वर्तमान में सभी एशियाई शेर गिर के जंगलों और उसके आसपास केंद्रित हैं, इसलिए किसी महामारी या प्राकृतिक आपदा के समय पूरी आबादी पर खतरा मंडरा सकता है। विशेषज्ञों के अनुसार, शेरों को मध्य प्रदेश के कूनो जैसे अन्य अनुकूल स्थानों पर स्थानांतरित करना (Translocation) सुरक्षा की दृष्टि से अनिवार्य है।

एक अन्य बड़ी चुनौती मानव-वन्यजीव संघर्ष है। शेरों की आबादी बढ़ने के साथ वे संरक्षित क्षेत्रों से बाहर निकलकर राजस्व क्षेत्रों और बस्तियों की ओर जा रहे हैं। विशेषज्ञों का सुझाव है कि स्थानीय समुदायों के साथ मिलकर 'सामुदायिक संरक्षण मॉडल' को मजबूत करना चाहिए। इसमें ग्रामीणों को शेरों के व्यवहार के बारे में प्रशिक्षित करना और मवेशियों के नुकसान पर तत्काल मुआवजे की व्यवस्था करना शामिल है। इसके अलावा, अवैध बिजली की बाड़ और खुले कुएं शेरों के लिए मौत के जाल साबित होते हैं, जिन्हें तुरंत ठीक करने की आवश्यकता है। वैज्ञानिक निगरानी के लिए रेडियो कॉलरिंग और ड्रोन तकनीक का अधिक उपयोग भविष्य की रणनीति का हिस्सा होना चाहिए।

अक्सर पूछे जाने वाले प्रश्न (FAQs)

1. भारत में वर्तमान में शेरों की कुल संख्या कितनी है?

अंतिम आधिकारिक गणना (पूर्णिमा अवलोकन) के आंकड़ों के अनुसार, भारत में एशियाई शेरों की कुल संख्या लगभग 674 है। इसमें पिछले पांच वर्षों में करीब 29% की वृद्धि दर्ज की गई है, जो संरक्षण प्रयासों की बड़ी जीत मानी जाती है।

2. क्या एशियाई शेर केवल गुजरात में ही पाए जाते हैं?

हाँ, वर्तमान में प्राकृतिक रूप से एशियाई शेर केवल गुजरात के गिर राष्ट्रीय उद्यान और उसके आसपास के क्षेत्रों (सौराष्ट्र के जिलों) में ही पाए जाते हैं। हालांकि, विशेषज्ञ उनकी सुरक्षा के लिए उन्हें अन्य राज्यों में भी बसाने की मांग कर रहे हैं ताकि किसी भी बीमारी के खतरे को कम किया जा सके।

3. शेरों और बाघों की गणना की पद्धति में क्या अंतर है?

बाघों की गणना मुख्य रूप से कैमरा ट्रैप और पगमार्क विश्लेषण के माध्यम से होती है, जबकि शेरों की गणना के लिए गुजरात वन विभाग अक्सर 'ब्लॉक काउंट' और 'पूर्णिमा अवलोकन' पद्धति का उपयोग करता है, जिसमें सीधी दृश्यता (Direct Sighting) को आधार बनाया जाता है।

संपादकीय निष्कर्ष

एशियाई शेरों का अस्तित्व भारत की प्राकृतिक विरासत और पारिस्थितिक संतुलन के लिए अत्यंत महत्वपूर्ण है। पिछले दशक में उनकी संख्या में हुई उल्लेखनीय वृद्धि वन विभाग और स्थानीय 'मालधारी' समुदाय के सह-अस्तित्व का परिणाम है। मेरा मानना है कि केवल संख्या बढ़ाना ही पर्याप्त नहीं है, बल्कि अब हमें उनके प्राकृतिक आवास के विस्तार और आनुवंशिक स्वास्थ्य पर ध्यान केंद्रित करना होगा। यदि हम समय रहते उन्हें अन्य सुरक्षित ठिकानों पर बसाने का साहस दिखाते हैं, तो हम आने वाली पीढ़ियों के लिए इन 'जंगल के राजाओं' का भविष्य सुरक्षित कर पाएंगे।