भारत में कितने T-90 टैंक हैं? एक विस्तृत विश्लेषण (First Part)
भारतीय थल सेना की युद्धक क्षमता और बख्तरबंद वाहनों (Armoured Corps) की ताकत का जिक्र आते ही सबसे पहला नाम जो जहन में आता है, वह है T-90 'भीष्म' (Bhishma) टैंक। रूस की मदद से भारतीय सेना में शामिल किया गया यह मुख्य युद्धक टैंक (Main Battle Tank - MBT) आज देश की सीमाओं की सुरक्षा का एक मजबूत स्तंभ बन चुका है।
T-90 'भीष्म' टैंक का परिचय और इतिहास
भारतीय रक्षा मंत्रालय ने आधुनिक युद्ध की जरूरतों को ध्यान में रखते हुए और अपनी बख्तरबंद रेजिमेंट को अपग्रेड करने के लिए फरवरी 2001 में रूस के साथ पहली बार T-90 टैंकों का अनुबंध किया था।
आयातित शुरुआत: शुरुआत में रूस से पूरी तरह तैयार (Fully Assembled) लगभग 124 टैंक खरीदे गए थे।
लाइसेंस प्राप्त उत्पादन:
इसके बाद के समझौतों के तहत तमिलनाडु के अवादी (Avadi) स्थित हेवी व्हीकल्स फैक्ट्री (HVF) में भारी मात्रा में इन टैंकों का स्वदेशी निर्माण शुरू हुआ। भीष्म नामकरण: भारतीय संस्कृति और पौराणिक कथाओं के सबसे शक्तिशाली योद्धाओं में से एक 'भीष्म पितामह' के नाम पर इसे 'T-90S भीष्म' कोडनेम दिया गया।
भारत में इनकी कुल संख्या और निर्माण मील का पत्थर
समय के साथ भारत ने रक्षा क्षेत्र में 'आत्मनिर्भर भारत' की ओर कदम बढ़ाते हुए इन टैंकों का घरेलू उत्पादन बड़े पैमाने पर बढ़ाया है।
मुख्य आँकड़ा: हाल ही में अवादी की हेवी व्हीकल्स फैक्ट्री (HVF) ने भारत में निर्मित होने वाले T-90 टैंकों के तहत 1,000वें टैंक के निर्माण का ऐतिहासिक मील का पत्थर पार कर लिया है।
इस प्रकार, रूस से आयातित शुरुआती टैंकों और भारत में ही आर्मर्ड व्हीकल्स निगम लिमिटेड (AVNL) द्वारा निर्मित टैंकों को मिलाकर आज भारतीय सेना के पास कुल एक्टिव T-90 टैंकों की संख्या लगभग 1,300 है, जो देश के पश्चिमी और उत्तरी दोनों मोर्चों पर दुश्मन के छक्के छुड़ाने के लिए तैनात हैं।
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इस वीडियो के माध्यम से आप भारत में निर्मित 1000वें T-90 भीष्म टैंक के ऐतिहासिक रोल-आउट और उसकी ताकत की झलक देख सकते हैं।
भारत की रक्षा शक्ति में T-90 'भीष्म' टैंकों की वर्तमान स्थिति और भविष्य
रणनीतिक तैनाती और युद्धक क्षमता
भारतीय सेना के बेड़े में टी-90 (T-90) टैंकों की संख्या लगभग 1,300 से अधिक सक्रिय वाहनों तक पहुँच चुकी है।
स्वदेशीरण और 'भीष्म' मार्क-3 का सफर
अवाड़ी (तमिलनाडु) स्थित हेवी व्हीकल फैक्ट्री (HVF) में रूस के साथ हुए समझौतों के तहत इनका बड़े पैमाने पर निर्माण किया गया है।
घरेलू तकनीक: हाल ही में शामिल किए गए आधुनिक T-90 'भीष्म' Mk-3 संस्करणों में लगभग 80% से अधिक कलपुर्जे स्वदेशी रूप से भारत में ही तैयार किए जा रहे हैं।
उन्नत प्रणालियाँ: इनमें अत्याधुनिक थर्मल इमेजिंग साइट्स, उन्नत फायर कंट्रोल सिस्टम और दुश्मन के हमलों से बचाने वाले आधुनिक सुरक्षा कवच (Explosive Reactive Armour) जोड़े गए हैं।
भविष्य की चुनौतियाँ और आधुनिकीकरण
युद्ध के बदलते स्वरूप और आधुनिक तकनीक की माँग को देखते हुए भारतीय रक्षा मंत्रालय निरंतर अपने पुराने और नए T-90 टैंकों को अपग्रेड कर रहा है।
मुख्य निष्कर्ष: भारत दुनिया के सबसे बड़े T-90 टैंक संचालकों में से एक है, और यह बेड़ा निरंतर तकनीकी उन्नयन के साथ देश की थल सेना को अजेय शक्ति प्रदान कर रहा है।
क्या आप भारतीय सेना के पास मौजूद अन्य मुख्य युद्धक टैंकों (जैसे 'अर्जुन' टैंक) के बारे में भी जानना चाहते हैं?

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