रत्ती का महत्व और उसका माप

रत्ती भारतीय उपमहाद्वीप में द्रव्यमान की एक पारंपरिक इकाई है, जिसका उपयोग आज भी खासकर जौहरी के क्षेत्र में होता है। यह इकाई प्राचीन काल से चली आ रही है और इसका नाम संस्कृत शब्द रक्तिका से लिया गया है, जो लाल रंग के गुंजा बीज (एब्रस प्रीटोरियस) के आधार पर निर्धारित किया गया है।

एक रत्ती का वजन लगभग 0.11339 ग्राम या फिर 1.8 अनाज के बराबर होता है। इतिहास में यह बीज न केवल धार्मिक अनुष्ठानों में प्रयोग होता था, बल्कि वजन के मापक के रूप में भी इसका उपयोग होता था। समय के साथ इसका माप मानकीकृत हुआ और आज भी आभूषण बनाने वाले इसे छोटे रत्नों या सोने-चांदी के वजन मापने के लिए प्रयोग करते हैं।

भारत, पाकिस्तान और नेपाल जैसे देशों में रत्ती का उपयोग अभी भी आम है, खासकर पारंपरिक जेवरों के वजन निर्धारण में। हालांकि आधुनिक इकाइयां जैसे ग्राम या कैरेट अब अधिक प्रचलित हैं, लेकिन रत्ती का सांस्कृतिक और ऐतिह

यह भी देखें

विस्तृत लेख

संबंधित विषय