हर साल करीब 4,500 करोड़ रुपये सिर्फ नोट छापने में खर्च होते हैं
भारत में हर साल करीब 4,500 करोड़ रुपये सिर्फ नए नोट छापने में खर्च हो जाते हैं। यह जानकारी भारतीय रिजर्व बैंक (आरबीआई) की ओर से दी गई है। 31 मार्च, 2022 तक के आंकड़ों के मुताबिक, नोटों की छपाई, उनके डिजाइन, सुरक्षा सुविधाओं और लॉजिस्टिक्स में इतनी राशि लगती है।
यह खर्च सिर्फ नोट छापने तक सीमित नहीं है। इसमें कागज, स्याही, डिजाइनिंग, परिवहन और पुराने नोटों को नष्ट करने का खर्च भी शामिल होता है। आरबीआई हर साल करोड़ों नोट छापता है ताकि देश की आर्थिक जरूरतों को पूरा किया जा सके और बाजार में नकदी का प्रवाह बना रहे।
इस बीच, डिजिटल भुगतान के बढ़ने के बावजूद, भारत अभी भी नकदी पर काफी निर्भर है। इसलिए नोटों की मांग लगातार बनी हुई है। खासकर त्योहारों के समय या बड़े आर्थिक बदलाव के बाद नकदी की जरूरत और बढ़ जाती है।
आरबीआई ने यह भी स्पष्ट किया है कि नोट छापने का
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