बाइबल: परमेश्वर का वचन

बाइबल परमेश्वर का वचन है – यह केवल एक धार्मिक ग्रंथ नहीं, बल्कि जीवन के हर पहलू पर प्रकाश डालने वाली दिव्य पुस्तक है। इसमें कुल 66 पुस्तकें हैं, जिन्हें लगभग 40 अलग-अलग लेखकों ने अलग-अलग समय और स्थानों पर लिखा। यह लिखावट हजारों वर्षों के अंतराल में हुई, फिर भी इसका संदेश एक सूत्र में बँधा हुआ है – मनुष्य के लिए परमेश्वर की प्रेम भरी योजना।

बाइबल में कुल 1189 अध्याय और 31,101 पद हैं। इनमें से पुराना नियम उस वाचा और व्यवस्था पर केंद्रित है जो यहूदियों को दी गई थी, जबकि नया नियम यीशु मसीह के जीवन, शिक्षाओं और मुक्ति के सुसमाचार पर। एक रोचक बात यह है कि पुराने नियम में “परमेश्वर” शब्द का प्रयोग कुल 3,382 बार हुआ है, जो इस बात को दर्शाता है कि पूरी पुस्तक परमेश्वर की पहचान, उनकी महिमा और मनुष्य के साथ उनके संबंध पर केंद्रित है।

बाइबल सिर्फ इतिहास या कहानियों का संग्रह नहीं है। यह जीवित वचन है, जो आज भी लोगों के दिलों को

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