10 फरवरी 2003: नाटो में तनाव का दिन
10 फरवरी 2003 को अंतरराष्ट्रीय राजनीति में एक महत्वपूर्ण मोड़ आया, जब फ्रांस और बेल्जियम ने नाटो के भीतर एक अहम फैसले को रोक दिया। इराक पर संभावित अमेरिकी हमले की आशंका के बीच, तुर्की ने अपनी सीमा की सुरक्षा सुनिश्चित करने के लिए नाटो से मदद मांगी थी। सामान्य प्रक्रिया के तहत, ऐसे मामलों में "मौन स्वीकृति" (silent approval) का नियम लागू होता है — यानी अगर कोई सदस्य आपत्ति न करे, तो प्रस्ताव स्वचालित मान लिया जाता है।
लेकिन इस दिन, फ्रांस और बेल्जियम ने स्पष्ट रूप से आपत्ति दर्ज कराकर उस प्रक्रिया को तोड़ दिया। उनका मानना था कि इराक पर युद्ध से पहले सैन्य तैयारियां बढ़ाना जल्दबाजी होगी और यह शांति की कूटनीति के खिलाफ है। इसके बाद जर्मनी ने भी उनके रुख का समर्थन कर दिया, भले ही वह सीधे वीटो नहीं डाल सका।
यह घटना नाटो के भीतर मतभेदों को उजागर करती है — एक ओर अमेरिका और उसके सहयोगी इराक पर कार्रवाई के पक्ष में थे
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