मोटर वाहन अधिनियम की धारा 185: शराब पीकर गाड़ी चलाना अब गंभीर अपराध
भारत में सड़क सुरक्षा को लेकर कानूनों में लगातार सख्ती बरती जा रही है। इसी कड़ी में मोटर वाहन अधिनियम की धारा 185 एक महत्वपूर्ण प्रावधान है, जो शराब पीकर वाहन चलाने वालों के खिलाफ कड़ी कार्रवाई का आधार है।
इस धारा के अनुसार, अगर कोई व्यक्ति मोटर वाहन को चलाते समय या चलाने का प्रयास करते समय ऐसी स्थिति में पाया जाता है कि उसके रक्त में एल्कोहल की मात्रा 100 मिलीलीटर प्रति 30 मिलीग्राम से अधिक है, तो वह अपराध का दोषी माना जाएगा। इसकी जांच श्वास विश्लेषक यंत्र या किसी अन्य प्रयोगशाला परीक्षण के माध्यम से की जाती है।
2019 में संशोधित होने के बाद यह कानून और सख्त हो गया है। अब ऐसे अपराध के लिए जुर्माना और कारावास दोनों का प्रावधान है। दोषी पाए जाने पर व्यक्ति को लंबी जेल की सजा हो सकती है। यह नियम न केवल ड्राइवरों के लिए चेतावनी है, बल्कि समाज में जिम्मेदारी का संदेश भी
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