1947 में कैसा था महंगाई का दौर: जब चंद पैसों में आ जाता था राशन

आजादी के वक्त यानी 1947 में देश का आर्थिक माहौल आज के दौर से बिल्कुल अलग था। उस समय आज की तरह महंगाई आसमान नहीं छूती थी, बल्कि रोजमर्रा की चीजें बेहद कम दामों पर आसानी से मिल जाती थीं। बुजुर्ग अक्सर उस दौर की यादें ताजा करते हुए बताते हैं कि तब चंद सिक्कों में ही पूरे महीने का घर चल जाता था।

आंकड़ों के मुताबिक, उस दौर में खान-पान की बुनियादी चीजें बेहद सस्ती थीं। बाजार में चावल मात्र 65 पैसे प्रति किलो और गेहूं सिर्फ 26 पैसे प्रति किलो के भाव पर बिकता था। वहीं, मिठास घोलने वाली चीनी की कीमत भी 57 पैसे प्रति किलो थी। अगर बात पेट्रोल की करें, तो अंतरराष्ट्रीय बाजार में इसकी कीमत करीब 40 पैनी हुआ करती थी, जो आज के मुकाबले नगण्य है।

बेशक उस समय लोगों की आमदनी भी आज के मुकाबले काफी कम थी, लेकिन पैसों की कीमत और चीजों के दाम में जमीन-आसमान का फर्क था। आज भले ही एक-दो रुपए में कुछ नहीं मिलता, लेकिन 1947 के वे दिन भारतीय इतिहास के पन्नों में एक ऐसी अर्थव्यवस्था की याद दिलाते हैं जब जीवन की बुनियादी जरूरतें आम आदमी की पहुंच में थीं।

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