1G का अंत कब हुआ?

भारत के अलावा कई देशों में पहली पीढ़ी की मोबाइल तकनीक, यानी 1G, 1990 के दशक की शुरुआत तक अपनी जगह खो चुकी थी। यह एक एनालॉग तकनीक थी, जो आवाज़ की बातचीत तक सीमित थी और डेटा सेवाओं की सुविधा नहीं देती थी।

1991 में 2G के आगमन के साथ 1G का अंत शुरू हो गया। 2G एक डिजिटल तकनीक थी, जिसने न सिर्फ कॉल की गुणवत्ता में सुधार किया, बल्कि एसएमएस टेक्स्ट मैसेजिंग को भी संभव बनाया। यह पहली बार था जब लोग मैसेज भेज सकते थे और मोबाइल डेटा का उपयोग होने लगा।

भारत में 1G का प्रयोग ज्यादा लंबे समय तक नहीं चला। जैसे-जैसे नेटवर्क बेहतर हुए, 2G तेजी से फैल गया और पुरानी तकनीक को पीछे छोड़ गया। आज हम 4G और 5G के दौर में हैं, लेकिन याद रखना चाहिए कि मोबाइल क्रांति की शुरुआत 1G के साथ ही हुई थी।

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