क्रिकेट के दो भगवान: सचिन और भारतीय जनता
अक्सर आपने सुना होगा – “सचिन तेंदुलकर क्रिकेट के भगवान हैं”। लेकिन क्या सच में कोई इंसान भगवान हो सकता है? जवाब है – नहीं। लेकिन जब बात क्रिकेट की हो और सचिन का नाम आए, तो भावनाएं ऐसी बोलती हैं, जैसे कोई देवता ही मैदान पर उतर आया हो।
सचिन तेंदुलकर को 'क्रिकेट का भगवान' कहना एक तरह से उनके प्रति पूजा भावना जताना है। उनके छक्के, शॉट्स, और सैकड़ों मैचों में दिया गया योगदान – सब कुछ ऐसा था जो आम खिलाड़ी से आगे था। भारत के लाखों घरों में उनकी तस्वीर भगवान की तरह लगी है। कई जगह तो उनकी मूर्तियां भी पूजी जाती हैं।
लेकिन अगर सच कहें, तो क्रिकेट के दो भगवान हैं – एक तो सचिन, जिन्होंने बल्ले से इतिहास रच दिया, और दूसरा – वो भारतीय दर्शक, जिसने उन्हें भगवान बना दिया। बिना उस प्यार, उस जुनून के, सचिन सिर्फ एक और खिलाड़ी होते।
आज भी, जब कोई युवा बल्लेबाज आता है, तो लोग कहते हैं – “अरे,
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