गंगा माँ के सात पुत्र और एक व्रत
भारतीय पौराणिक कथाओं में देवी गंगा की एक अनोखी गाथा है। कहा जाता है कि गंगा माँ के कुल आठ पुत्र हुए, लेकिन पहले सात को वह नदी में बहा देती थीं। यह कोई क्रूरता नहीं, बल्कि एक दिव्य व्रत का हिस्सा था।
प्राचीन कथा के अनुसार, आठ वसुओं ने एक ब्राह्मण की गाय चुराई थी, जिसके कारण उन्हें पृथ्वी पर मानव जन्म लेने का श्राप मिला। गंगा ने उन्हें जन्म देने का वचन दिया, लेकिन उनमें से सात का जन्म होते ही वह उन्हें गंगा में बहा देतीं, ताकि वे तुरंत मुक्ति पा सकें। इसीलिए वे बच्चे नदी में बहते चले गए।
लेकिन आठवाँ पुत्र भीष्म (तब देवव्रत) थे। राजा शांतनु से गंगा का विवाह हुआ था, और उन्होंने शर्त रखी थी कि वह उनके कर्मों में कभी हस्तक्षेप नहीं करेंगे। इसी कारण शांतनु चुप रहे, जब गंगा ने पहले सात बच्चों को नदी में बहा दिया।
आखिरकार, आठवें पुत्र को वह जीवित रखती हैं और उन्हें बड़ा होकर महान योद्धा और निष्ठावान भीष्म के र
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