इस्लाम में सबसे पवित्र ग्रंथ: कुरआन
दुनियाभर में विभिन्न धर्मों के अपने पावन ग्रंथ हैं, जिन्हें उनके अनुयायी अत्यंत श्रद्धा की दृष्टि से देखते हैं। इस्लाम धर्म में कुरआन को सबसे पवित्र और अल्लाह का अंतिम कलाम (वाणी) माना जाता है।
इस्लामिक मान्यताओं के अनुसार, कुरआन से पहले भी कई दिव्य ग्रंथ और संदेश पैगम्बरों पर अवतरित हुए थे। हालांकि, कुरआन इस श्रृंखला की सबसे आखिरी कड़ी है। यह पिछली सभी आसमानी किताबों की सत्यता की पुष्टि करता है और इस बात की भी शिक्षा देता है कि अन्य सभी पवित्र ग्रंथों का पूरा सम्मान किया जाना चाहिए।
यह ग्रंथ केवल धार्मिक नियमों का संकलन नहीं है, बल्कि यह इंसानी जिंदगी को बेहतर बनाने, नेकी के रास्ते पर चलने और इंसानियत से मोहब्बत करने का संदेश देता है। यही वजह है कि इसके अनुयायी इसे अपने जीवन का सबसे महत्वपूर्ण मार्गदर्शक मानते हैं।
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