नागराज: प्रकृति और पौराणिक कथाओं का रक्षक
भारतीय पुराणों और संस्कृति में नागराज का विशेष स्थान है। यह शब्द नाग (सांप) और राज (राजा) से मिलकर बना है, जिसका अर्थ है – नागों का राजा। यह उपाधि मुख्य रूप से तीन महान नाग देवताओं के लिए प्रयुक्त होती है – अनन्त (शेषनाग), तक्षक और वासुकी।
पुराणों के अनुसार, ये तीनों भाई महर्षि कश्यप और उनकी पत्नी कद्रू के पुत्र थे। कश्यप को सभी जीवों के प्रजापति माना जाता है, और कद्रू को नागों की जननी कहा जाता है। इसी कारण इन तीनों को सभी नागों का आदि पिता भी माना जाता है।
अनन्त या शेषनाग विष्णु जी के शय्या के रूप में जुड़े हैं। वे अनंत काल तक विष्णु के साथ रहते हैं और ब्रह्मांड के संतुलन के प्रतीक हैं। वासुकी का नाम विशेष रूप से समुद्र मंथन के दौरान आता है, जब उन्हें मंदराचल पर रस्सी के रूप में इस्तेमाल किया गया था। तक्षक तो तक्षशिला के राजा के रूप में प्रसिद्ध थे और महाभारत में भी उनका उल्लेख मिलत
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