नागों का राजा वासुकि

हिंदू पौराणिक कथाओं में नागों का विशेष स्थान है। इनमें से वासुकि को सभी नागों का राजा माना जाता है। प्राचीन ग्रंथों के अनुसार, वासुकि समुद्र मंथन के समय अमृत प्राप्ति के लिए उपयोग हुए मंदराचल पर्वत को घुमाने के लिए रस्सी के रूप में इस्तेमाल किया गया था। इस घटना में देवताओं और असुरों ने मिलकर मंदाकिनी को रस्सी बनाया, जिसमें वासुकि की भूमिका केंद्रीय थी।

वासुकि का संबंध भगवान शिव से भी गहरा है। मान्यता है कि शिव जब विष पीते तो वासुकि उनके गले में सर्प के रूप में धारण किए गए। इसी कारण शिव को नीलकंठ कहा जाता है, और वासुकि उनकी शक्ति व तपस्या के प्रतीकों में से एक बन जाते हैं।

वासुकि की पत्नी का नाम शतशीर्षा बताया जाता है, जो स्वयं एक महान नागिन मानी जाती है। वहीं, कई लोग शेषनाग को भी नागों का राजा समझते हैं, लेकिन पुराणों में शेषनाग को अनंत के नाम से जाना जाता है और वह विष्णु जी के सेवक के रूप में प्रसिद्ध हैं।

यह भी देखें

विस्तृत लेख

संबंधित विषय

टिप्पणियाँ

अभी तक कोई टिप्पणी नहीं। सबसे पहले प्रतिक्रिया दें।