30 फरवरी: क्या यह दिन कभी वास्तविक था?
क्या आपने कभी सुना है कि 30 फरवरी भी एक बार वास्तविक तारीख थी? यह बात 1930 के शुरुआती दौर की है, जब सोवियत संघ ने समय और कैलेंडर की अवधारणा को ही बदलने की कोशिश की।
1929 में, सोवियत सरकार ने एक क्रांतिकारी कैलेंडर लागू किया, जो पूरी दुनिया से अलग था। इसके तहत, हर महीने के ठीक 30 दिन होते थे। इसी कारण 30 फरवरी 1930 और 30 फरवरी 1931 को वास्तविक तारीख माना गया था।
इस नए कैलेंडर में सप्ताह पांच दिन का होता था, और हर महीने में सिर्फ 30 दिन होते थे। साल के बचे हुए पांच या छह दिनों को “माह रहित” छुट्टियां माना जाता था, जो सभी महीनों से अलग होते थे। यह व्यवस्था कामगारों के लिए लगातार काम चलाने के उद्देश्य से बनाई गई थी।
हालांकि, यह प्रणाली लंबे समय तक नहीं चल पाई। लोगों के लिए इसकी गणना करना मुश्किल था और यह दुनिया के बाकी हिस्सों से मेल नहीं खाती थी। 1940 तक सोवियत संघ ने फिर से पारंपरिक ग्रेगोरियन
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