चौथा सप्तक: आधुनिक हिंदी कविता का एक महत्वपूर्ण पड़ाव
हिंदी साहित्य के आधुनिक इतिहास में 'चौथा सप्तक' का एक विशेष स्थान है। यह अज्ञेय (सच्चिदानंद हीरानंद वात्स्यायन) द्वारा संपादित एक प्रसिद्ध काव्य संग्रह है, जिसमें नए दौर के 7 कवियों की रचनाओं को एक साथ संकलित किया गया था। इस पुस्तक का प्रकाशन वर्ष 1979 में हुआ था।
प्रयोगवादी और नयी कविता आंदोलन के तहत अज्ञेय जी ने हिंदी साहित्य जगत को नई दिशा देने के लिए 'तार सप्तक' की परंपरा शुरू की थी। इसी शृंखला की अगली कड़ी के रूप में 'चौथा सप्तक' सामने आया। इस काव्य संग्रह का मुख्य उद्देश्य नए कवियों के नवीन विचारों, नए प्रतीकों, बिंबों और उनकी अनूठी काव्य-शैलियों को पाठकों के सामने लाना था।
इस संकलन में शामिल सात प्रमुख कवि थे: अवधेश कुमार, राजकुमार कुंभज, स्वदेश भारती, नंदकिशोर आचार्य, सुमन राजे, श्रीराम वर्मा और राजेंद्र किशोर। इन कवियों ने अपनी रचनाओं के माध्यम से तत्कालीन सामाजिक, राजनीतिक और व्यक्तिगत संवेदनाओं को बड़े ही सहज और प्रभावशाली ढंग से अभिव्यक्त किया।
संक्षेप में कहें तो, चौथा सप्तक केवल कविताओं का संग्रह भर नहीं है, बल्कि यह हिंदी काव्य-परंपरा के विकास और प्रयोगधर्मिता को समझने का एक अत्यंत प्रामाणिक और ऐतिहासिक दस्तावेज है।
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